अब यात्रा सिर्फ घूमने-फिरने या मौज-मस्ती के लिए नहीं रह गई है. लोग अब अपनी सेहत और मानसिक शांति को ध्यान में रखकर डेस्टिनेशन चुन रहे हैं. खासकर महामारी के बाद से यह बदलाव साफ नजर आ रहा है. लोग अब अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए वेलनेस ट्रैवल को प्राथमिकता दे रहे हैं.
भारत इस बदलाव का केंद्र बन गया है. आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के समृद्ध इतिहास के कारण देशी और विदेशी पर्यटक यहां दीर्घकालिक स्वास्थ्य समाधान तलाश रहे हैं. भारत सरकार भी “हील इन इंडिया” जैसे अभियानों और पर्यटन ढांचे में निवेश के जरिए भारत को वैश्विक वेलनेस हब बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है.
अब मध्यम वर्ग भी ले रहा वेलनेस टूरिज्म का आनंद
पहले वेलनेस टूरिज्म सिर्फ अमीरों तक सीमित था, लेकिन अब यह मध्यम वर्ग में भी लोकप्रिय हो रहा है. लोग अब रोगों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने के लिए आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और समग्र उपचारों की ओर रुख कर रहे हैं. स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते कई भारतीय हर साल 2-3 हफ्ते सिर्फ स्व-देखभाल (Self-care) के लिए समर्पित कर रहे हैं. वे ऐसे रिसॉर्ट्स की तलाश कर रहे हैं जो केवल आराम ही नहीं बल्कि पुरानी बीमारियों, मेटाबॉलिक डिसऑर्डर और तनाव से जुड़ी समस्याओं का इलाज भी दें.
CGH अर्थ वेलनेस के सीईओ सिद्धार्थ डोमिनिक कहते हैं, “सच्ची सेहत सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि मन और आत्मा को भी ठीक करने से आती है. हमारी चिकित्सा पद्धतियां आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और योग पर आधारित हैं, जो बीमारी की जड़ को खत्म करने में मदद करती हैं.”
उन्होंने बताया कि भारतीय यात्रियों में आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति रुचि तेजी से बढ़ी है. अब लोग हर साल वेलनेस रिट्रीट पर जाने को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना रहे हैं.
2031 तक 29.88 अरब डॉलर का हो जाएगा भारत का वेलनेस टूरिज्म
भारत में वेलनेस टूरिज्म इंडस्ट्री 2024 में 19.43 अरब डॉलर की थी और 2031 तक 29.88 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. यह 6.45% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रही है.
वहीं, वैश्विक वेलनेस टूरिज्म बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है. 2024 में यह 895.09 अरब डॉलर था, जो 2025 तक 978.14 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है.
भारत अपनी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की प्रामाणिकता और किफायती कीमतों के कारण इस बाजार में प्रमुख स्थान पर है. पश्चिमी देशों की तुलना में यहां आयुर्वेदिक उपचार बहुत कम खर्च में मिल जाता है. यही वजह है कि विदेशी पर्यटक भारत के योग और आयुर्वेदिक रिट्रीट्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
महामारी के कारण 2020 में मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म 1.83 लाख विदेशी पर्यटकों तक गिर गया था. लेकिन 2022 में यह 4.75 लाख तक पहुंचा और 2023 के पहले 10 महीनों में ही 5.04 लाख को पार कर गया. इस ग्रोथ को और बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने आयुष वीजा जैसी पहल की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए आयुर्वेदिक और वेलनेस उपचारों तक पहुंच आसान हुई है.
विदेशी मेहमानों में बढ़ रहा आयुर्वेद का आकर्षण
एवीपी रिसर्च फाउंडेशन, कोयंबटूर के रिसर्च डायरेक्टर डॉ. सोमित कुमार कहते हैं, “विदेशी मेहमानों के बीच आयुर्वेद की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. वे इसे सिर्फ बीमारी के इलाज के लिए नहीं, बल्कि एंटी-एजिंग और पुनर्जीवन चिकित्सा (Regenerative Medicine) के रूप में देख रहे हैं.”
उन्होंने बताया कि तनाव से जुड़ी समस्याओं पर भी आयुर्वेद का अच्छा असर होता है. पंचकर्म थेरेपी सबसे अधिक पसंद की जा रही है, क्योंकि यह शरीर को पूरी तरह से डिटॉक्स कर देती है.
वहीं, वैद्यरत्नम वृंदावन आयुर्वेद चिकित्सालय, बद्दी के प्रमोटर राज ऋषि गर्ग कहते हैं, “पहले लोग सिर्फ बीमारी के बाद आयुर्वेद सेंटर आते थे, लेकिन अब लोग इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं.”
उन्होंने बताया कि शहरों में रहने वाले युवा पेशेवर और कामकाजी लोग भी अब आयुर्वेद को अपनाने लगे हैं. वे तनाव, इम्युनिटी बढ़ाने और दीर्घकालिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आयुर्वेदिक उपचार ले रहे हैं.
वेलनेस टूरिज्म में भारत के लिए अपार संभावनाएं
इस क्षेत्र के विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत अभी वेलनेस टूरिज्म की अपार संभावनाओं की सिर्फ शुरुआत भर कर पाया है.
सिद्धार्थ डोमिनिक कहते हैं, “हमारे वेलनेस रिट्रीट्स को खासतौर पर शांति और स्वास्थ्य लाभ देने के लिए डिजाइन किया गया है. हमारा फोकस उच्च गुणवत्ता और व्यक्तिगत देखभाल पर है. भारत ने इस क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है. हमें अभी बहुत आगे जाना है.”
भारत में आयुर्वेद के अलावा योग, प्राकृतिक चिकित्सा, आध्यात्मिक उपचार और पारंपरिक उपचारों की भी काफी मांग है. ऋषिकेश, मैसूर, केरल और पुडुचेरी वेलनेस टूरिज्म के बड़े केंद्र बन चुके हैं.
अब वेलनेस रिट्रीट्स सिर्फ अमीरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह आम जनता के लिए भी सुलभ हो रहे हैं. सरकार के प्रयासों और लोगों की बढ़ती जागरूकता के चलते भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक वेलनेस टूरिज्म का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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