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60 साल पुराना कानून होगा खत्म! 1 अप्रैल से बदल जाएगी आपकी सैलरी और टैक्स की दुनिया, जानें क्या होंगे 4 बड़े बदलाव?

1 अप्रैल 2026 से नया Income Tax Act 2025 लागू होगा, जिससे टैक्स सिस्टम आसान और आधुनिक बनेगा. ITR डेडलाइन, HRA, निवेश और TDS-TCS नियमों में बड़े बदलाव सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालेंगे…

Income Tax Act 2025 new rules India 2026: भारत के टैक्स इतिहास में 1 अप्रैल 2026 से एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है. वित्त वर्ष 2027 के आगाज के साथ ही देश में करीब छह दशकों से चले आ रहे आयकर अधिनियम 1961 को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा. इसकी जगह नया आयकर अधिनियम 2025 (New Tax Rules India) लागू होगा, जो न केवल नियमों को सरल बनाएगा बल्कि टैक्स भरने के पुराने तरीकों को भी पूरी तरह बदल देगा.

इस नए सिस्टम में सरकार ने ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ के उलझाव को खत्म कर अब सीधे ‘टैक्स ईयर’ की अवधारणा पेश की है, जिससे करदाताओं को यह समझने में आसानी होगी कि वे किस समय की आय पर विवरण दे रहे हैं.

आईटीआर फाइलिंग की समय सीमा में बड़ी राहत

नए टैक्स सिस्टम के तहत सबसे महत्वपूर्ण बदलाव रिटर्न दाखिल करने (ITR Filing 2026) की डेडलाइन को लेकर किया गया है. सरकार ने वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए तो 31 जुलाई की पुरानी समय सीमा को ही बरकरार रखा है, लेकिन स्वरोजगार (Self-employed) और फ्रीलांस प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी राहत दी है.

अब वे लोग जो ऑडिट के दायरे में नहीं आते, अपना इनकम टैक्स रिटर्न 31 अगस्त तक फाइल कर सकेंगे. इसके साथ ही, अब करदाताओं को अपने रिटर्न में सुधार करने यानी रिवाइज्ड रिटर्न भरने के लिए 31 मार्च तक का वक्त मिलेगा. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि दिसंबर के बाद सुधार करने पर करदाताओं को अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा.

मेट्रो शहरों का विस्तार और HRA के नए नियम

मध्यम वर्ग और किराए के मकान में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए यह नया वित्त वर्ष मिली-जुली खबरें लेकर आया है. सरकार ने हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में अधिक छूट वाले शहरों की सूची का विस्तार किया है. अब दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के साथ-साथ बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी इस श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे इन शहरों के निवासियों को अब ज्यादा टैक्स बचत होगी.

हालांकि नियमों को थोड़ा सख्त भी बनाया गया है. अब टैक्स छूट का दावा करने के लिए मकान मालिक की जानकारी और पैन कार्ड देना अनिवार्य होगा. राहत की बात यह है कि बच्चों की शिक्षा, हॉस्टल खर्च और मील कूपन पर मिलने वाली टैक्स फ्री लिमिट को पहले से बढ़ा दिया गया है.

निवेशकों के लिए बदला मुनाफा कमाने का गणित

शेयर बाजार और सोने में निवेश करने वालों पर इस नए कानून का सीधा असर पड़ने वाला है. अब शेयर बायबैक से होने वाले मुनाफे पर टैक्स का भुगतान डिविडेंड के बजाय ‘कैपिटल गेन’ के रूप में करना होगा, जो निवेशकों की टैक्स देनदारी को बदल देगा. इसके अलावा फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में लगने वाले सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी की गई है, जिससे अब डेरिवेटिव ट्रेडिंग पहले के मुकाबले महंगी हो जाएगी.

वहीं सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के शौकीनों को यह ध्यान रखना होगा कि टैक्स छूट का लाभ अब केवल उन्हीं बॉन्ड्स पर मिलेगा जो सीधे सरकारी निर्गम (Original Issue) के दौरान खरीदे गए हों. बाजार से खरीदे गए पुराने बॉन्ड्स पर अब यह छूट नहीं मिलेगी.

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विदेश यात्रा और टीडीएस नियमों का सरलीकरण

वैश्विक स्तर पर लेनदेन करने वालों और विदेश घूमने वालों के लिए सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है. विदेश यात्रा के पैकेज पर लगने वाले टीसीएस (TCS) को घटाकर अब मात्र 2 प्रतिशत कर दिया गया है. इसी तरह विदेश में शिक्षा और इलाज के लिए भेजे जाने वाले पैसों पर भी टीसीएस की दरों को कम किया गया है. इसके अलावा टीडीएस (TDS) की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया गया है.

अब टैक्सपेयर्स को अलग-अलग आय स्रोतों के लिए बार-बार फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी. वे एक ही घोषणा पत्र के जरिए कई तरह के टीडीएस से बच सकेंगे. साथ ही अब एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदते समय टीएएन (TAN) की जरूरत खत्म कर दी गई है, अब केवल पैन कार्ड के जरिए ही ट्रांजैक्शन पूरा किया जा सकेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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