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India-New Zealand Trade Deal: डेयरी और खेती पर भारत ने नहीं दिया कोई ‘डिस्काउंट’, किसानों के हितों की रक्षा के लिए बनाया अभेद्य किला

भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले व्यापार समझौते में सरकार ने देसी किसानों का पूरा ख्याल रखा है. दूध, पनीर और तांबे जैसे सेक्टरों में कोई रियायत नहीं दी गई है, जबकि कीवी और सेब के लिए कड़े कोटा तय किए गए हैं.

India New Zealand Trade Deal

India-New Zealand Trade Deal: भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की चर्चा इन दिनों जोरों पर है. दोनों देशों ने बातचीत पूरी कर ली है और अगले तीन महीनों में इस पर दस्तखत होने की उम्मीद है. लेकिन, इस डील की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर भारतीय किसानों और छोटे कारोबारियों (MSMEs) के लिए आई है. भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि वह डेयरी, सब्जियां और चीनी जैसे संवेदनशील सेक्टरों में न्यूजीलैंड को कोई भी ‘इंपोर्ट ड्यूटी’ यानी आयात शुल्क में छूट नहीं देगी. सीधे शब्दों में कहें तो, सरकार ने विदेशी सामान की बाढ़ से अपने देसी उत्पादकों को बचाने के लिए एक लंबी ‘एक्सक्लूजन लिस्ट’ तैयार की है.

क्यों लगा है ‘नो एंट्री’ का बोर्ड?

न्यूजीलैंड दुनिया में डेयरी प्रोडक्ट्स का बहुत बड़ा खिलाड़ी है. ऐसे में भारतीय डेयरी किसानों को डर था कि अगर वहां का दूध, दही या पनीर सस्ता होकर भारत आने लगा, तो उनका धंधा चौपट हो सकता है. सरकार ने इस चिंता को गंभीरता से लिया है. दूध, क्रीम, दही, पनीर और यहां तक कि शहद और चीनी जैसे उत्पादों को इस फ्री ट्रेड डील से बाहर रखा गया है.

इसके अलावा प्याज, चना, मटर, मक्का और बादाम जैसी फसलों पर भी कोई छूट नहीं दी जाएगी. इतना ही नहीं, हथियारों, जेम्स एंड ज्वेलरी, कॉपर (तांबा) और एल्युमीनियम जैसे नॉन-एग्री सेक्टरों को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है ताकि हमारे घरेलू उद्योगों पर आंच न आए.

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कीवी और सेब पर ‘लिमिटेड’ एंट्री, पर शर्तों के साथ

हालांकि, व्यापार में कुछ लेना और कुछ देना तो पड़ता ही है. इसलिए भारत ने कुछ चुनिंदा चीजों के लिए दरवाजा थोड़ा खोला है, लेकिन वहां भी ‘कंडीशन्स’ लागू हैं. जैसे कि न्यूजीलैंड का मशहूर मानुका हनी, सेब, कीवी और दवाइयों में इस्तेमाल होने वाला एल्ब्यूमिन.

अभी भारत मानुका हनी पर 66% टैक्स वसूलता है. नई डील के तहत, साल में केवल 200 टन शहद ही बिना टैक्स के आ सकेगा, वो भी तब जब उसकी कीमत कम से कम 20 डॉलर प्रति किलो (MIP) हो. अगर इससे ज्यादा शहद आया, तो उस पर भारी टैक्स लगेगा.

सेब के शौकीनों के लिए क्या है खबर?

सेब के मामले में भी गणित बहुत कड़ा है. फिलहाल भारत न्यूजीलैंड से करीब 31 हजार टन सेब मंगाता है जिस पर 50% ड्यूटी लगती है. अब तय हुआ है कि पहले साल में 32,500 टन सेब पर 25% ड्यूटी लगेगी, लेकिन इसकी कीमत 1.25 डॉलर प्रति किलो से कम नहीं होनी चाहिए. छठे साल तक यह कोटा बढ़कर 45 हजार टन हो जाएगा. अगर न्यूजीलैंड इस तय सीमा से एक भी सेब ज्यादा भेजता है, तो उसे फिर से वही पुराना 50% वाला भारी टैक्स चुकाना पड़ेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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