US 100 Percent Tariff on India: हाल ही में नई दिल्ली में संपन्न हुए 18वें BRICS समिट में भारत और वैश्विक दक्षिण (Global South) की बढ़ती ताकत देखकर अमेरिका की राजनीति गरमा गई है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से लगातार रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर नकेल कसने के लिए अमेरिकी संसद में हलचल तेज हो गई है. अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ में एक ऐसा विवादास्पद संशोधन पेश किया गया है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत का नाम सीधे ‘ब्लैकलिस्टेड’ श्रेणी में डालने की मांग की गई है.
बता दें यदि यह बिल अपनी मूल शर्तों के साथ कानून बनता है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम ‘सेकेंडरी टैरिफ’ लगाने का असीमित अधिकार मिल जाएगा.
सीनेट में भारी बहुमत के बाद हाउस में पेंच( US 100 Percent Tariff on India)
अमेरिका का यह बहुचर्चित कड़ा कानून, जिसे ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ कहा जा रहा है, पिछले महीने अमेरिकी सीनेट में 86 के मुकाबले 11 वोटों के विशाल बहुमत से पारित हो चुका है. इस कानून का सीधा उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र (Oil & Gas) की कमर तोड़ना है.
यही नहीं वाशिंगटन का मानना है कि रूस अपने कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर मिलने वाले अरबों डॉलर का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध की फंडिंग में कर रहा है. सीनेट से पास बिल में कहा गया था कि जो पांच देश रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदेंगे, उन पर 100% टैरिफ का नियम लागू होगा.
बिल में सीधे ‘भारत’ का नाम जोड़ने की मांग
अब जब यह बिल निचले सदन में चर्चा के लिए पहुंचा, तो डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ सांसद स्टेनी हॉयर ने इसमें एक कड़ा संशोधन पेश कर दिया. हॉयर ने मांग की है कि किसी ‘सस्पेंस’ की जगह सीधे उन प्रमुख देशों का नाम बिल में लिखा जाए जो रूस के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं.
हॉयर द्वारा पेश संशोधन में भारत, चीन, तुर्की, यूएई, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक का नाम सीधे बिल में जोड़ने का प्रस्ताव है. इसका सीधा मतलब यह है कि भारत पर प्रतिबंधों की तलवार सीधे तौर पर लटकाने की साजिश रची जा रही है.
अमेरिकी संसद में आपस में भिड़े सांसद
एक तरफ जहां भारत का नाम सीधे जोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी संसद में इस बात को लेकर भी मतभेद गहरा गए हैं कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इतना असीमित टैरिफ अधिकार दिया जाना चाहिए? डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स और उनके तीन सहयोगियों ने एक काउंटर-प्रस्ताव पेश करते हुए बिल की उस ‘धारा 113’ को ही पूरी तरह हटाने की मांग की है, जो राष्ट्रपति को 100% सेकेंडरी टैरिफ लगाने की शक्ति देती है. मीक्स का मानना है कि भारत जैसे रणनीतिक और क्वॉड (QUAD) साझेदार पर ऐसा टैरिफ लगाने से अमेरिका का अपना व्यापारिक और कूटनीतिक ढांचा चरमरा जाएगा.
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क्या भारत पर लागू हो पाएगा 100% टैरिफ?
अमेरिकी संसद में बिल को लेकर जारी खींचतान के बीच भारतीय विदेश और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका चाहकर भी भारत पर 100% टैरिफ जैसा आत्मघाती कदम नहीं उठा सकता. भारत न केवल इंडो-पैसिफिक में अमेरिका का सबसे बड़ा काउंटर-चीन पार्टनर है, बल्कि अमेरिकी कंपनियों का एक विशाल बाजार भी है.
यदि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं, तो भारत के कड़े पलटवार से खुद अमेरिकी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. बहरहाल, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इस संशोधन पर होने वाली वोटिंग पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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