पूर्वोत्तर में हुआ रेल विकास
Indian Railway In Northeast: साल 2014 में कांग्रेस के लंबे शासन के बाद पीएम मोदी सत्ता में आए. उनके आने के साथ ही भारत के संपूर्ण विकास पर फोकस किया गया. उनकी प्राथमिकता में देश के भीतर हर सुदूर इलाके तक कनेक्टिविटी को पहुंचाना था. इसी का नतीजा है कि अब उत्तर-पूर्व भारत तक रेल की रफ्तार बढ़ गए हैं. नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में रहने वाले लोग भी भारत के अन्य हिस्सों में आसान सफर कर सकते हैं. 2018 से 2025 तक का समय इन राज्यों में रेल विस्तार (Railway Expansion) के लिए स्वर्णिम काल रहा. इस दौरान रेलवे ने कई विकास कार्यों के जरिए अलग-थलग क्षेत्रों को को मुख्यधारा से जोड़ा.
उत्तर-पूर्व भारत ने रेलवे (Railway Development In Northeast) ने साल 2018 से 2025 तक कई प्रोजेक्ट चलाए. पहली बार इन इलाकों को राजधानी से जोड़ा (Railway Connectivity In Northeast) गया. ट्रैक को विद्युतीकृत किया गया और भारतीय रेल को दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण पहाड़ी इलाकों तक पहुंचाया गया. 7 साल के दौरान 10 ऐसे प्रोजेक्ट चलाए गए जिनके कारण अब बुनियादी ढांचा विकास के साथ सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल रहा है. इसके साथ ही उत्तर-पूर्व में पर्यटन ने भी जोर पकड़ा है.
बैराबी-सैरंग ब्रॉड गेज रेलवे लाइन
- 26 साल बाद आइजोल भारत के रेल नेटवर्क से जुड़ा.
- 51.38 किलोमीटर लंबी यह परियोजना इलाके के लिए गेम-चेंजर बन गई है.
- इसमें 48 सुरंगें, 55 बड़े पुल (एक 104 मीटर ऊंचा) और 87 छोटे पुल बनाए गए हैं.
- इससे यात्रा और माल ढुलाई की पहुंच में सुधार हुआ है.
- भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को भी इससे रफ्तार मिलेगी.
मुख्य मार्ग का विद्युतीकरण
- लुमडिंग-तिनसुकिया और डिब्रूगढ़-दुलियाजान खंड का विद्युतीकरण हुआ.
- पहली बार राजधानी एक्सप्रेस डिब्रूगढ़ से दिल्ली पहुंची.
- यह पूर्वोत्तर में गति और हरित कनेक्टिविटी को बढ़ावा देता है.
- इससे यात्रा की लागत और समय दोनों कम हुए हैं.
- व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिला है.
सबसे ऊंचा रेलवे नोनी ब्रिज
- मणिपुर में दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पियर ब्रिज बना.
- यह पुल मणिपुर में जिरीबाम-तुपुल-इंफाल रेलवे परियोजना का हिस्सा है.
- नोनी ब्रिज के पियर 141 मीटर तक ऊंचे हैं.
- इस परियोजना में 45 सुरंगें और 145 पुल शामिल हैं.
- नोनी ब्रिज इंफाल-जिरिबाम यात्रा की यात्रा को 12 से 2 घंटे में ला दिया है.
- इस पुल के बनने से दिल्ली की पहुंच दक्षिण पूर्व एशिया तक हो सकती है.
शोखुवी-मोलवोम रेल लिंक
- नागालैंड में 15.42 किलोमीटर लंबे शोखुवी-मोलवोम खंड पर पहली मालगाड़ी के ट्रायल रन हुआ.
- यह लिंक धनसिरी-जुबजा परियोजना का हिस्सा है.
- यह नागालैंड के मोलवोम को राज्य का तीसरा प्रमुख रेलवे स्टेशन बना दिया है.
- इस परियोजना को माल ढुलाई मार्ग जोड़कर लागत कम किया जा रहा है.
- इससे नागालैंड की कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ स्थानीय व्यापारियों की आय भी बढ़ रही है.
मेघालय में पहली मालगाड़ी
- साल 2023 में मेघालय में पहली मालगाड़ी पहुंची.
- 21 वैगनों वाली एक मालगाड़ी में खाद्यान्न पहुंचाया गया.
- प्रदेश में चार नए ट्रैक और एक गुड्स यार्ड का काम पूरा हुआ.
- मेघालय में मालगाड़ियों के आगमन से वहां तेज और सस्ती डिलीबरी आसान हुई है.
- इसने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान और किफायती बनाया है.
असम को मिली पहली वंदे भारत एक्सप्रेस
- असम को मिली पहली वंदे भारत एक्सप्रेस के साथ कनेक्टिविटी अपग्रेड हुई.
- इस ट्रेन ने गुवाहाटी को न्यू जलपाईगुड़ी से तेज रफ्तार में जोड़ा.
- यह ट्रेन 5.5 घंटे में 407 किलोमीटर की दूरी तय करती है और हफ्ते में 6 दिन चलती है.
- इससे काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और कामाख्या मंदिर जैसे प्रतिष्ठित स्थलों के पर्यटन को बढ़ावा मिला है.
- असम और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है.
नागालैंड को मिला शोखुवी रेलवे स्टेशन
- नागालैंड को 100 साल बाद शोखुवी के रूप में दूसरा रेलवे स्टेशन मिला.
- इसके जरिए दीमापुर से अलग प्रदेश में रेल नेटवर्क का विकास हुआ.
- यह धनसिरी-जुबजा रेल परियोजना का महत्वपूर्ण विस्तार था.
- स्टेशन बनने के बाद डोनी पोलो एक्सप्रेस को यहां तक पहुंचाया गया.
- इसका उद्देश्य दीमापुर को कोहिमा से जोड़ना है जो सीमावर्ती इलाके में भारत की रणनीतिक बढ़त भी है.
मणिपुर में पहुंची पहली मालगाड़ी
- आजादी के बाद पहली मालगाड़ी मणिपुर में पहुंची.
- तामेंगलोंग के रानी गाइदिन्ल्यू स्टेशन में इसका भव्य स्वागत हुआ.
- यह नया स्टेशन जिरीबाम-इंफाल रेल परियोजना का हिस्सा है.
- इससे राज्य में आवाजाही और व्यापार आसान हुआ है.
- इसके साथ ही इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं.
पूर्वोत्तर में पहली जनशताब्दी
- मणिपुर और त्रिपुरा को जोड़ने वाली जनशताब्दी पूर्वोत्तर में पहली जनशताब्दी है.
- इसे पूर्वोत्तर में अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी के लिए एक नये युग का आगाज माना गया.
- हफ्ते में 3 दिन चलने वाली यह ट्रेन 300 किलोमीटर का सफर 6 घंटे में करती है.
- इस ट्रेन के चल जाने से 12 घंटे का सफर 6 घंटे में पूरा हो जाता है.
- इस ट्रेन को मणिपुर और त्रिपुरा के बीच 1,000 करोड़ में तैयार ब्रॉड-गेज ट्रैक पर चलाया जाता है.
डबल-डेकर बोगीबील पुल
- असम में 4.94 किलोमीटर लंबे बोगीबील पुल बनकर तैयार हुआ.
- डबल-डेकर संरचना में बना पुल इंजीनियरिंग का चमत्कार है.
- इसके निचले हिस्से में रेल ट्रैक है और ऊपरी हिस्से में तीन-लेन की सड़क है.
- इस पुल को 5,900 करोड़ रुपये का लागत से तैयार किया गया है.
- इस पुल के तैयार होने के बाद पहली ट्रेन तिनसुकिया-नाहरलगुन इंटरसिटी एक्सप्रेस चली.
- इस पुल का डिजाइन ऐसे तैयार किया गया है कि यह भूकंप को भी झेल सकता है.
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पूर्वोत्तर को मिली विकास का रफ्तार
कुल मिलाकर साल 2018 से 2025 का समय उत्तर-पूर्व भारत में रेलवे कनेक्टिविटी (Indian Railway Connectivity) में परिवर्तनकारी युग रहा. इस दौरान सरकार के निरंतर हुए प्रयासों के द्वारा इलाके में बुनियादी ढांचा तेजी से बढ़ा. सुगम यात्रा के साथ ही इन 10 परियोजनाओं से इलाके में पर्यटन और व्यापार मजबूत हुआ है. इससे पूर्वोत्तर में रोजगार के मौके बढ़े हैं. आइजोल का 26 साल बाद रेलवे से जुड़ने और नगालैंड को दूसरा रेलवे स्टेशन मिलना सबसे बड़ी उपलब्धि है.
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