भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है और यह देश के विकास, रोज़गार और स्थायी प्रगति का एक मजबूत आधार बन रही है. स्टेट ऑफ इंडिया डिजिटल इकोनॉमी रिपोर्ट 2024 के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में डिजिटल सेक्टर का योगदान भारत की जीडीपी का 11.74% था, जो करीब ₹31.64 लाख करोड़ ($402 बिलियन) के बराबर है. इस क्षेत्र ने 1.46 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दिया, जो भारत की कुल कार्यबल का 2.55% है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था बन चुका है. डिजिटलाइजेशन के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव के कारण, यह क्षेत्र 2029-30 तक भारत की जीडीपी का 20% तक योगदान कर सकता है. इससे यह कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों को भी पीछे छोड़ सकता है.
पारंपरिक क्षेत्रों की तुलना में 5 गुना ज्यादा उत्पादकता
डिजिटल अर्थव्यवस्था की उत्पादकता पारंपरिक उद्योगों से लगभग 5 गुना अधिक है. आईसीटी सेवाएं (ICT Services) और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे डिजिटल उद्योगों का सकल मूल्य वर्धन (GVA) में 7.83% योगदान रहा. डिजिटल प्लेटफॉर्म, बैंकिंग, खुदरा (रिटेल) और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में डिजिटलीकरण से भी यह वृद्धि संभव हुई.
आने वाले वर्षों में क्लाउड सेवाएं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वैश्विक क्षमता केंद्र (GCCs) इस विकास में प्रमुख भूमिका निभाएंगे. भारत अब दुनिया के 55% GCCs का मेजबान बन चुका है. ये केंद्र मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा स्थापित किए जाते हैं, जहां से आईटी सपोर्ट और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट सेवाएं दी जाती हैं.
विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल बदलाव
खुदरा (रिटेल): ई-कॉमर्स कंपनियां अब फिजिकल स्टोर्स के साथ मिलकर ओमनी-चैनल मॉडल अपनाने पर ध्यान दे रही हैं. एआई टूल्स और चैटबॉट्स से ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाया जा रहा है.
बैंकिंग और वित्त (BFSI): बैंकिंग सेवाएं लगभग पूरी तरह डिजिटल हो चुकी हैं. हालांकि, लोन और निवेश जैसी सेवाएं अभी भी ऑफ़लाइन ज़्यादा प्रचलित हैं.
शिक्षा: शैक्षणिक संस्थान अब ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षा को मिलाकर हाइब्रिड मॉडल अपना रहे हैं.
डिजिटल अर्थव्यवस्था का अगले कुछ वर्षों में 30% तक विकास दर देखने को मिल सकती है. पिछले 10 वर्षों में डिजिटल तकनीकों से जुड़े उद्योगों की वृद्धि दर 17.3% रही, जो कुल आर्थिक वृद्धि दर (11.8%) से कहीं अधिक है.
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-भारत एक्सप्रेस
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