Quick Commerce Market in India: मॉर्गन स्टेनली की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत का Quick Commerce Market 2030 तक 57 अरब डॉलर (लगभग 4.8 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच जाएगा, जो कि मेट्रो शहरों से परे बढ़ती मांग के कारण होगा.
2024 में यह बाजार 7 अरब डॉलर का था, और 2025 में इसके 10 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. यह तेजी से विस्तार भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव को दर्शाता है, जहां लोग तेज डिलीवरी की मांग कर रहे हैं.
रिपोर्ट में कहा गया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, क्योंकि क्विक कॉमर्स कंपनियां जैसे ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट और जेप्टो अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं. 2024 में भारत के डिजिटल उपभोक्ता आधार ने 30% की वृद्धि देखी, और 2030 तक 300 मिलियन लोग ऑनलाइन खरीदारी करेंगे.
किराना और दैनिक जरूरतों की वस्तुओं की मांग इस क्षेत्र की वृद्धि का मुख्य चालक है. हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के बाद कुछ क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स चुनौतियां बढ़ीं, लेकिन कंपनियों ने ड्रोन और स्वचालित वाहनों जैसी स्वदेशी तकनीकों का उपयोग करके इनका समाधान किया.
मॉर्गन स्टेनली ने यह भी बताया कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने स्थानीय स्तर पर तकनीकी नवाचार को बढ़ावा दिया है, जिससे क्विक कॉमर्स कंपनियां लागत कम कर पा रही हैं. यह क्षेत्र न केवल आर्थिक विकास में योगदान देगा, बल्कि लाखों नौकरियां भी सृजित करेगा.
भारत का Quick Commerce Market वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर बन रहा है, जो भारत की डिजिटल क्रांति का हिस्सा बनना चाहते हैं.
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