मूडीज़ रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट में भारत की आर्थिक स्थिरता को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिका द्वारा लगाए जा सकने वाले संभावित टैरिफ के नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए अच्छी स्थिति में है. इसके साथ ही, पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव का भी भारत की अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं जताई गई है.
हालांकि, एजेंसी ने यह भी आगाह किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित टैरिफ योजनाएं वैश्विक आर्थिक विकास को धीमा कर सकती हैं, जिससे भारत भी अप्रभावित नहीं रहेगा.
मूडीज़ ने कहा, “भारत के पास मज़बूत घरेलू आर्थिक आधार, विशाल आंतरिक बाज़ार और वस्तु व्यापार पर कम निर्भरता है, जो उसे वैश्विक व्यापार संकट और अमेरिकी टैरिफ से बेहतर ढंग से निपटने में मदद करते हैं.”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर व्यापार समझौतों के तहत भारत पर टैरिफ में कुछ राहत मिलती है, तो अमेरिका से भारतीय वस्तुओं की मांग बढ़ सकती है, जिससे भारत को फ़ायदा हो सकता है.
मज़बूत घरेलू मांग और कम व्यापार निर्भरता भारत की ताक़त
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय निर्यात का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कम योगदान, जिसे अक्सर एक कमज़ोरी माना जाता है, ऐसे समय में भारत की ताक़त बन सकता है. मूडीज़ ने कहा, “हालांकि अमेरिका भारतीय वस्तुओं का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है, फिर भी भारत की GDP में निर्यात की हिस्सेदारी अन्य एशिया-प्रशांत देशों की तुलना में कम है, जिससे टैरिफ का असर सीमित रह सकता है.”
इसके अलावा, भारत की सेवा निर्यात क्षमता भी एक प्रमुख ताकत के रूप में सामने आती है. रिपोर्ट के अनुसार, सेवा क्षेत्र के निर्यात पर वैश्विक व्यापार अनिश्चितता का कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा और यह क्षेत्र तेज़ी से आगे बढ़ता रहेगा.
हालांकि, अमेरिका की वीज़ा और इमिग्रेशन नीति में बदलाव इस क्षेत्र के लिए चुनौती बन सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया, “यदि अमेरिका की इमिग्रेशन नीति सख़्त होती है, तो इससे भारतीय आईटी और सेवा कंपनियों को अमेरिका में काम करने वाले कर्मचारियों की उपलब्धता घट सकती है. इससे लागत बढ़ सकती है और संचालन में कठिनाइयाँ आ सकती हैं.”
पाकिस्तान से बढ़ते तनाव को लेकर मूडीज़ का मानना है कि इसका भारत की आर्थिक गतिविधियों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. रिपोर्ट के अनुसार, “भारत की पाकिस्तान के साथ व्यापारिक भागीदारी बेहद सीमित है और जो क्षेत्र भारत के औद्योगिक और कृषि उत्पादन में अग्रणी हैं, वे संघर्ष प्रभावित इलाकों से दूर स्थित हैं.”
हालांकि, मूडीज़ ने यह भी जोड़ा कि यदि रक्षा बजट में बढ़ोतरी होती है, तो इससे भारत की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ सकता है और वित्तीय सुधार की गति धीमी हो सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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