NCLT अध्यक्ष जस्टिस अनुपविंदर सिंह ग्रेवाल का सम्मेलन में संबोधन
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के अध्यक्ष जस्टिस अनुपविंदर सिंह ग्रेवाल(NCLT Justice Grewal) ने दिवालिया और कॉर्पोरेट विवादों के निपटारे को लेकर एक बहुत बड़ा और कड़ा संदेश दिया है. दरअसल चंडीगढ़ में PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा आयोजित ‘IBC Pulse 2.0’ सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने साफ कहा कि NCLT का काम सिर्फ अदालती केस निपटाना नहीं है बल्कि यह सीधे तौर पर राष्ट्र निर्माण और देश सेवा से जुड़ा हुआ काम है.
बता दें सम्मेलन में न्यायपालिका, उद्योग जगत और दिवालियापन विशेषज्ञों के 200 से ज्यादा दिग्गजों ने हिस्सा लिया. इस मंच से देश के दिवालियापन कानून यानी Insolvency and Bankruptcy Code (IBC), 2016 को और ज्यादा तेज, पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए बड़े सुधारों का खाका खींचा गया.
NCLT को लेकर क्या बोले जस्टिस ग्रेवाल?(NCLT Justice Grewal)
मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे जस्टिस ग्रेवाल ने कहा कि IBC 2016 भारत के आर्थिक ढांचे का वो मजबूत खंभा है जिसने कॉर्पोरेट जगत में जवाबदेही और पारदर्शिता कायम की है. एक मजबूत और तेज दिवालिया प्रक्रिया केवल तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए सामरिक जरूरत है.
इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और बंद होने की कगार पर खड़ी कंपनियों को फिर से नया जीवन मिलता है. उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौर को याद करते हुए बताया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों के बावजूद NCLT ने बिना रुके मामलों का तेजी से निपटारा किया था.
टेक्नोलॉजी और नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
जस्टिस ग्रेवाल ने आगे कहा कि भविष्य में NCLT को और ज्यादा असरदार बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, जजों की संख्या, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और संस्थागत संसाधनों में बड़ा निवेश करना होगा. उन्होंने सम्मेलन में मौजूद सभी स्टेकहोल्डर्स को सुधार के लिए अपने सुझाव देने का खुला न्योता दिया.
वहीं NCLT के संस्थापक अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एम. कुमार ने ट्रिब्यूनल के सफर को रेखांकित करते हुए कहा कि बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ-साथ संस्थाओं का तेजी से आधुनिक होना बेहद जरूरी है.
नई बेंचों और सदस्यों की नियुक्ति की उठी मांग
NCLT के पूर्व न्यायिक सदस्य हरनाम सिंह ठाकुर ने अदालत में पेंडिंग पड़े केसों को जल्द खत्म करने पर जोर दिया. उन्होंने सरकार और सिस्टम से NCLT की नई बेंच गठित करने, सदस्यों की संख्या बढ़ाने और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने की पुरजोर अपील की ताकि तय समय-सीमा (Timelines) के भीतर केसों का फैसला हो सके. PHDCCI की NCLT एवं IBC कमेटी के चेयरमैन जी.पी. मदान और पूर्व न्यायिक सदस्य डॉ. पी.एस.एन. प्रसाद ने भी माना कि बढ़ते वर्कलोड को संभालने के लिए NCLT को और ज्यादा ताकतवर बनाना होगा.
कॉर्पोरेट दिग्गजों की चौपाल
PHDCCI के उप महानिदेशक डॉ. जतिंदर सिंह और हरियाणा के अपर महाधिवक्ता शेखर राज शर्मा ने भारत की बदलती अर्थव्यवस्था और IBC के जमीनी क्रियान्वयन पर अपनी बात रखी. सम्मेलन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में कुलदीप कुमार करीर, प्रवीण गुप्ता, विवेक अत्री, ईशान मदान, अतुल सूद, अनिल काटिया, नवनीत गुप्ता और के.वी. जैन जैसे दिग्गज वक्ताओं ने दिवालिया प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक अड़चनों (Bottlenecks) को दूर करने पर लंबी चर्चा की, ताकि कंपनियों के दिवालिया समाधान की प्रक्रिया और ज्यादा भरोसेमंद बन सके.
सम्मेलन में जुटे 200 से ज्यादा प्रतिनिधि
इस पूरे सम्मेलन का संचालन NCLT और IBC कमेटी के सह-अध्यक्षों – रंजना रॉय गवाई, हरीश तनेजा, रचित मित्तल और अभिषेक आनंद ने किया, जबकि सम्मेलन के संयोजक जलेश ग्रोवर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया. 200 से अधिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी वाले इस ‘IBC Pulse 2.0’ सम्मेलन ने यह साफ कर दिया कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के रास्ते में NCLT और IBC कानून सबसे रीढ़ की हड्डी साबित होने वाले हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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