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कंपोनेंट पीएलआई से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को मिलेगा बढ़ावा, नौकरियां होंगी सृजित

वैश्विक उद्योग के रुझानों को दर्शाते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भारत की यात्रा अलग-अलग चरणों से गुजरी है.

electronics Component exports

सांकेतिक तस्वीर.

वित्त वर्ष 2025 में स्मार्टफोन निर्यात 2 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया, जिसमें अकेले आईफोन का हिस्सा लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये रहा. आईटी मंत्रालय ने 22,919 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) को अधिसूचित किया है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए ग्लोबल हब के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

एक्सपोर्ट में 6 गुणा बढ़ोतरी

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का नोटिफिकेशन कैबिनेट के फैसले के क्रम में है. उन्होंने कहा, “हमारी सरकार हमेशा खुले विचारों वाली, परामर्शदात्री और समावेशी रही है. हम किसी भी कानून या नीति को अंतिम रूप देने से पहले सभी के विचारों को ध्यान में रखते हैं.” पिछले एक दशक में, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में पांच गुणा और निर्यात में छह गुणा से अधिक की वृद्धि हुई है, जिसमें निर्यात सीएजीआर 20 प्रतिशत से अधिक और उत्पादन सीएजीआर 17 प्रतिशत से अधिक है.

400 से अधिक उत्पादन इकाइयां

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा, “थोड़े ही समय में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम, जिसमें कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरर्स और विविध प्रकार के खिलाड़ी शामिल हैं, काफी विकसित हो गया है. आज, 400 से अधिक उत्पादन इकाइयां हैं, जिनमें बड़ी और छोटी दोनों तरह की इकाइयां हैं, जो विभिन्न प्रकार के कंपोनेंट का निर्माण करती हैं.”

वैश्विक उद्योग के रुझानों को दर्शाते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भारत की यात्रा अलग-अलग चरणों से गुजरी है. यह तैयार माल से शुरू होकर सब-असेंबली तक आगे बढ़ते हुए और अब डीप कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है.

यह क्षेत्र लगातार इस तीसरे चरण में आगे बढ़ रहा है, जो वैल्यू एडिशन, आत्मनिर्भरता और इकोसिस्टम को लेकर एक बड़ी उपलब्धि है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि योजना को कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल ग्रिड जैसे कई क्षेत्रों में लाभ के साथ एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में डिजाइन किया गया है, जिससे अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

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यह योजना विशेष रूप से निष्क्रिय इलेक्ट्रॉनिक घटकों पर केंद्रित है, जिन्हें नई पहल के तहत समर्थन दिया जाएगा. इसके विपरीत, सक्रिय घटक भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के दायरे में आते हैं. निष्क्रिय घटकों की सूची में रेसिस्टर, कैपेसिटर, कनेक्टर, इंडक्टर, स्कीकर्स, रिले, स्विच, ऑसिलेटर, सेंसर, फिल्म, लेंस आदि शामिल हैं. यह योजना इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में उपयोग किए जाने वाले पूंजीगत उपकरणों के डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग का भी समर्थन करेगी. रोजगार सृजन सभी आवेदकों के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता होगी, जिसमें घटक निर्माता और पूंजीगत उपकरण उत्पादक दोनों शामिल हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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