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लगातार आठ हफ्तों से क्यों गिर रहा शेयर बाजार? बिकवाली का दौर कब होगा खत्म

Share Market: भारतीय शेयर बाजार में लगातार आठ हफ्तों से दबाव बना हुआ है. FIIs की बिकवाली, महंगा क्रूड, HDFC Bank में गिरावट और ग्लोबल संकेतों का बाजार पर असर जानें.

Share Market News

शेयर बाजार में लगातार आठ हफ्तों से दबाव बना हुआ है

Share Market: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को एक बार फिर बिकवाली हावी दिखी. लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के बाद नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भले ही तेजी के साथ हुई, लेकिन कुछ ही घंटों में बाजार की तस्वीर बदल गई. सुबह मजबूत शुरुआत करने वाला निफ्टी दोपहर तक 22,400 के नीचे फिसल गया, जबकि सेंसेक्स भी गिरकर करीब 71,850 अंक के स्तर पर पहुंच गया.

बाजार में इस कमजोरी की सबसे बड़ी वजह बैंकिंग और कुछ बड़े शेयरों में आई तेज बिकवाली रही. खास तौर पर HDFC बैंक के शेयरों में करीब 2.50 फीसदी की गिरावट ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया. HDFC बैंक निफ्टी के प्रमुख हेवीवेट शेयरों में शामिल है, इसलिए इसमें बड़ी गिरावट का सीधा असर पूरे इंडेक्स पर दिखाई दिया. निफ्टी बैंक में भी दबाव बना रहा. इसके अलावा एशियन पेंट्स के शेयर करीब ढाई फीसदी तक कमजोर हुए.

शुरुआत शानदार, फिर बदला बाजार का रुख

वैश्विक बाजारों से मिले बेहतर संकेतों के चलते सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने अच्छी शुरुआत की थी. कारोबार के दौरान निफ्टी बढ़कर 22,621.80 अंक तक पहुंच गया. हालांकि, ऊपरी स्तरों पर निवेशकों की बिकवाली बढ़ने लगी और धीरे-धीरे इंडेक्स नीचे आता गया. बाजार में मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए एक्सपर्ट्स की नजर 22,650 से 22,700 के स्तर पर बनी हुई है. उनका मानना है कि जब तक निफ्टी इस जोन के ऊपर मजबूती से वापस नहीं आता, तब तक बाजार में दबाव बना रह सकता है.

FIIs की बिकवाली ने बढ़ाई चिंता

भारतीय बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बड़ी चिंता बनी हुई है. डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने के कारण विदेशी फंड उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं.


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कच्चा तेल और वैश्विक तनाव भी चुनौती

भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है. क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है. महंगा तेल भारत के आयात बिल और कंपनियों की लागत, दोनों पर असर डाल सकता है.

हालांकि अमेरिकी बाजार से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं. सितंबर में अमेरिका की जॉब ग्रोथ उम्मीद से कमजोर रही और पिछले दो महीनों के रोजगार आंकड़ों में भी बड़ी कटौती हुई. इससे फेड की ब्याज दर बढ़ाने की संभावना काफी कम मानी जा रही है. वहीं, एक्सेंचर के मजबूत तिमाही नतीजों के बाद उसके शेयर करीब 22 फीसदी चढ़े, जिससे भारतीय IT शेयरों को भी कुछ सहारा मिला. इसके बावजूद घरेलू बाजार में फिलहाल बिकवाली का दबाव कायम है.

-भारत एक्सप्रेस



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