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भारत की दिवाला व्यवस्था को S&P से बड़ी मान्यता, Group C से Group B में हुआ अपग्रेड

S&P Global Ratings ने भारत की दिवाला व्यवस्था की रैंकिंग को Group C से बढ़ाकर Group B किया. IBC के तहत बेहतर रिकवरी और तेज समाधान को बड़ी वजह बताया.

S&P Global Ratings

S&P Global Ratings: भारत की दिवाला और दिवालियापन प्रक्रिया को लेकर एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति मिली है. S&P Global Ratings ने बुधवार को भारत के “ज्यूरिडिक्शन रैंकिंग असेसमेंट” को Group C से बढ़ाकर Group B कर दिया. यह बदलाव इस बात का संकेत है कि दुनिया अब भारत की दिवाला समाधान प्रणाली को पहले से कहीं अधिक मजबूत और विश्वसनीय मानने लगी है.

क्रेडिटर-फ्रेंडली सिस्टम की दिशा में बड़ा कदम

S&P ने कहा कि भारत के दिवालियापन ढांचे में लेनदारों के हितों को पहले की तुलना में बेहतर सुरक्षा मिल रही है. इसी कारण “creditor-friendliness” की रेटिंग को weak से medium कर दिया गया.

एजेंसी का कहना है कि इंसॉल्वेंसी एंड Bankruptcy Code (IBC) के तहत लगातार सफल समाधान हुए हैं, जिनमें क्रेडिटर्स की भूमिका प्रमुख रही है. इससे न केवल समय पर समाधान मिल पाए, बल्कि वसूली दर भी पहले की तुलना में काफी बेहतर रही है.

S&P के अनुसार, IBC ने भारत के कॉर्पोरेट सेक्टर में क्रेडिट अनुशासन मजबूत किया है और प्रक्रिया को लेनदारों के पक्ष में झुका दिया है. पुराने दौर के विपरीत, अब प्रमोटर्स को यह जोखिम रहता है कि कर्ज न चुकाने की स्थिति में वे अपने व्यवसाय का नियंत्रण खो सकते हैं.

वसूली दर दोगुनी से भी ज्यादा

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब औसतन वसूली मूल्य 30% से अधिक है, जबकि पुराने नियमों के तहत यह केवल 15–20% था. IBC की एक और बड़ी उपलब्धि यह है कि खराब कर्जों को सुलझाने में लगने वाला औसत समय 6–8 साल से घटकर लगभग 2 साल तक आ गया है. स्टील और पावर जैसे सेक्टरों में यह सुधार और भी ज्यादा दिखता है, जहां एसेट वैल्यू अधिक होने के कारण secured creditors को बेहतर वसूली मिलती है.

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चुनौतियां अभी बाकी

S&P ने यह भी माना कि भारत की व्यवस्था अभी Group A वाले देशों के स्तर तक नहीं पहुंची है. सिर्फ 30% की औसतन recovery अब भी कम मानी जाती है. साथ ही, secured और unsecured creditors को एक ही क्लास में मतदान करवाना कभी-कभी secured creditors की स्थिति कमजोर कर सकता है, खासकर तब जब unsecured कर्ज ज्यादा हो. एजेंसी ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में अदालतों पर निर्भरता और प्रक्रिया की अनिश्चितता अब भी चुनौती बनी हुई है.

ज्यूरिडिक्शन रैंकिंग क्या दर्शाती है?

यह रैंकिंग बताती है कि किसी देश की दिवालियापन प्रणाली लेनदारों को कितना सुरक्षा प्रदान करती है और पूरी प्रक्रिया कितनी अनुमानित है. अब S&P दुनियाभर की दिवाला व्यवस्थाओं को Group A, Group B और Group C में बांटता है और भारत का Group C से Group B में आना एक सकारात्मक संकेत है.

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– भारत एक्सप्रेस



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