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भविष्य के सुपरहिट बिजनेस: भारत के ये 4 सेक्टर्स बदलने जा रहे हैं देश की किस्मत, कमाई का मिलेगा बंपर मौका

भारत की अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए 4 नए ‘सनराइज सेक्टर्स’ तैयार हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों और ग्रीन एनर्जी तक, इन क्षेत्रों में सरकार के भारी निवेश से भविष्य में कमाई और निवेश के बंपर मौके बनने वाले हैं.

Business, Economy

Sunrise Sectors in India: आज भारत में कुछ ऐसे नए और आधुनिक सेक्टर्स उभर रहे हैं, जो आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था का चेहरा पूरी तरह बदल देंगे. बिजनेस की भाषा में इन्हें Sunrise Sectors कहा जाता है. ये वो बिजनेस हैं जो पुरानी लीक से हटकर नई टेक्नोलॉजी और इनोवेटिव आइडियाज पर काम कर रहे हैं. जिस तरह कभी सोशल मीडिया और इंटरनेट ने दुनिया को बदला था, वैसे ही आज भारत के ये चार सेक्टर्स निवेश और कमाई के सबसे बड़े जरिए बनने जा रहे हैं. आइए जानते हैं इन सेक्टर्स के बारे में और देखते हैं कि सरकार के सपोर्ट से ये कैसे रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं:

मेक इन इंडिया का जलवा

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का बाजार पिछले 10 सालों में रॉकेट की रफ्तार से बढ़ा है. कभी जहां देश में सिर्फ 1.9 लाख करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनता था, वह आज बढ़कर करीब 11.3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. इसमें सबसे बड़ा हाथ मोबाइल फोन्स का है.

विदेशों में भारतीय सामानों की डिमांड का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2026 में हमारा इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 24% की छलांग लगाकर 47.96 बिलियन डॉलर हो गया है. सबसे मजेदार बात यह है कि इसमें से अकेले अमेरिका ने हमसे करीब 19.68 बिलियन डॉलर का सामान खरीदा, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना है.

वहीं, दुनिया भर में चिप की किल्लत को देखते हुए सरकार ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ को हरी झंडी दे दी है. बजट 2026-27 में इसके लिए 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. सरकार के कुल 76,000 करोड़ रुपये के इस महा-मिशन में से 65,000 करोड़ रुपये पहले ही खर्च किए जा चुके हैं और फिलहाल 24 नई कंपनियां इस सेक्टर में दिन-रात काम कर रही हैं.

रिन्यूएबल एनर्जी में भारत का दबदबा

भारत अब रिन्यूएबल एनर्जी यानी पर्यावरण के अनुकूल बिजली बनाने के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है. मार्च 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोयला-पेट्रोल जैसे पारंपरिक ईंधनों को छोड़कर अन्य ग्रीन सोर्सेज से 283.46 गीगावाट बिजली पैदा होने लगी है. इसमें सबसे बड़ा रोल सौर ऊर्जा (150.26 गीगावाट) और पवन ऊर्जा (56.09 गीगावाट) का है.

पर्यावरण को लेकर भारत कितना गंभीर है, इसका सबूत यह है कि जून 2025 में ही देश ने पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों को समय से 5 साल पहले ही हासिल कर लिया था. सरकार ने इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए बजट 2026-27 में रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय को 44,614 करोड़ रुपये दिए हैं, जो पिछले साल से 40% ज्यादा है. साथ ही ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ के लिए 19,744 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं. हमारा लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट ग्रीन एनर्जी बनाने का है, जो अब बहुत आसान लग रहा है.

सड़कों पर ईवी का दम

भारतीयों के सिर चढ़कर बोल रहा है इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) का जादू. साल 2026 में देश के भीतर रिकॉर्ड 24.52 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ बिकीं, जो पिछले साल की तुलना में 24.6% अधिक है. सबसे तगड़ा क्रेज इलेक्ट्रिक कारों में देखा गया, जिनकी बिक्री 83.6% बढ़ गई. हालांकि, बाजार पर सबसे ज्यादा कब्जा टू-व्हीलर्स (स्कूटर और बाइक) का रहा, जिनकी 14 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिकीं. पिछले चार सालों में भारतीय सड़कों पर 83 लाख से ज्यादा ईवी उतर चुकी हैं.

सरकार का टारगेट है कि 2030 तक देश की सड़कों पर दौड़ने वाली हर 100 में से 30 गाड़ियां इलेक्ट्रिक हों. इसके लिए देश भर में 12,000 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन एक्टिव हो चुके हैं. साथ ही, ‘पीएम ई-ड्राइव’ स्कीम के तहत 10,900 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और बैटरी कंपोनेंट्स पर टैक्स में छूट दी गई है ताकि हमें चीन या अन्य देशों पर निर्भर न रहना पड़े.

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दुनिया की दवाई की दुकान बना भारत

दवाइयों के मामले में भारत आज दुनिया की रीढ़ बन चुका है. हम दुनिया के 191 देशों को दवाइयां सप्लाई कर रहे हैं. वित्त वर्ष 2026 में हमारा फार्मा एक्सपोर्ट 31 बिलियन डॉलर के पार निकल गया है, जिसका आधा हिस्सा अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित बाजारों में जाता है. यही नहीं, अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल इक्विपमेंट्स का बाजार भी 2020-21 के 2.5 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 4.1 बिलियन डॉलर का हो चुका है.

इस सेक्टर को ग्लोबल लीडर बनाए रखने के लिए बजट 2026-27 में ‘बायोफार्मा शक्ति’ नाम की एक नई योजना का ऐलान हुआ है, जिसके तहत अगले 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. फिलहाल देश का मेडिकल डिवाइस मार्केट 1.02 लाख करोड़ रुपये का है, जिसे 2030 तक 4.27 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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