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धोखाधड़ी के मामले में 23 सालों से फरार मोनिका कपूर की ‘घर वापसी’, CBI ने अमेरिका से किया प्रत्यर्पित

Monica Kapoor: मोनिका कपूर पर 1998 में फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए छह रिप्लेनिशमेंट लाइसेंस प्राप्त करने का आरोप है, जिनके आधार पर ड्यूटी-फ्री गोल्ड की तस्करी हुई. जिससे भारत सरकार को ₹1.44 करोड़ का नुकसान हुआ.

Monica Kapoor

मोनिका कपूर

Monica Kapoor: भारतीय जांच एजेंसियों की वर्षों की कोशिश आखिरकार रंग लाई है. करोड़ों रुपये की आयात-निर्यात धोखाधड़ी मामले में फरार चल रही मोनिका कपूर को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की यह सफलता न केवल एक बड़े आर्थिक अपराध के खिलाफ कार्रवाई है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब देश से भागकर भी कानून से बचना आसान नहीं रहा.

मोनिका कपूर पर 1998 में फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए छह रिप्लेनिशमेंट लाइसेंस प्राप्त करने का आरोप है, जिनके आधार पर ड्यूटी-फ्री गोल्ड की तस्करी हुई. उन्होंने यह लाइसेंस प्रीमियम पर अहमदाबाद स्थित ‘दीप एक्सपोर्ट्स’ को बेचे, जिससे भारत सरकार को ₹1.44 करोड़ का नुकसान हुआ. इस साजिश में उनके दो भाई राजन खन्ना और राजीव खन्ना भी शामिल थे. जिन्हें 2017 में अदालत ने दोषी ठहराया था. लेकिन मोनिका कपूर जांच और अदालत की प्रक्रिया से लगातार बचती रही और वर्ष 2006 में उन्हें घोषित अपराधी घोषित कर दिया गया.

CBI ने वर्ष 2010 में अमेरिका से की थी प्रत्यर्पण की मांग

CBI ने वर्ष 2010 में अमेरिका से मोनिका के प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग की थी. इसके बाद लंबे कानूनी संघर्ष और अमेरिका के न्याय विभाग तथा होमलैंड सिक्योरिटी जैसे एजेंसियों के साथ समन्वय से आखिरकार 2025 में इस मामले में सफलता मिली. मोनिका को अमेरिकी हिरासत से लेकर CBI की टीम भारत लेकर लौटी है. यहां उनकी मेडिकल जांच कराई जाएगी और फिर उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा, जहां जांच एजेंसी उनकी रिमांड की मांग करेगी.

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ऐसे मामलों से नहीं किया जाएगा समझौता- CBI

CBI ने इस प्रत्यर्पण को अंतरराष्ट्रीय सहयोग और न्याय की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया है. एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि वह आर्थिक अपराधियों को किसी भी देश से वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे मामलों में समझौता नहीं किया जाएगा.

यह मामला न सिर्फ वर्षों पुराने आर्थिक अपराध का न्याय दिलाने की ओर एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भी साबित करता है कि अब कानूनी कार्रवाई की पकड़ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर चुकी है. अपराधी चाहे कितनी भी दूर भागें, कानून उनके पीछे चलता रहेगा.

– भारत एक्सप्रेस



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