CBSE Middle East board exams cancelled: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच छिड़ी भीषण जंग का असर अब भारतीय छात्रों की पढ़ाई पर भी दिखने लगा है. खाड़ी देशों में बिगड़ते हालातों और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है. बोर्ड ने मिडिल ईस्ट के कई प्रमुख देशों में होने वाली कक्षा 12 की सभी बोर्ड परीक्षाओं को रद्द (Cancel) कर दिया है. यह फैसला उन इलाकों में रह रहे छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए किसी झटके से कम नहीं है, जो महीनों से इन परीक्षाओं की तैयारी में जुटे थे.
कहां रद्द हुईं बोर्ड परीक्षाएं?
CBSE की ओर से जारी ताजा अपडेट के मुताबिक, बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों में फिलहाल परीक्षाएं करा पाना मुमकिन नहीं है. बोर्ड ने साफ किया है कि 16 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच होने वाली 12वीं की सभी परीक्षाएं अब नहीं होंगी.
इससे पहले बोर्ड ने इन देशों में 10वीं की परीक्षाएं भी रद्द कर दी थीं और 12वीं के शेड्यूल में कुछ बदलाव किए थे. अधिकारियों को उम्मीद थी कि शायद हालात संभल जाएंगे, लेकिन जिस तेजी से मिसाइल हमले और बमबारी बढ़ी है, उसने बोर्ड को यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया.
पुरानी स्थगित परीक्षाओं का क्या होगा?
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मार्च की शुरुआत में (1 से 9 मार्च के बीच) जिन परीक्षाओं को केवल स्थगित (Postpone) किया गया था, उन्हें भी अब पूरी तरह से रद्द मान लिया जाए. यानी अब उन देशों में एग्जाम सेंटर पर छात्रों के लौटने की कोई संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है.
छात्रों के मन में बड़ा सवाल, रिजल्ट कैसे बनेगा?
परीक्षाएं रद्द होने के बाद अब सबसे बड़ी उलझन ‘रिजल्ट’ को लेकर है. 12वीं के छात्रों के लिए ये नंबर उनके कॉलेज एडमिशन और करियर के लिए बेहद कीमती होते हैं. CBSE ने फिलहाल इस पर सस्पेंस बरकरार रखा है. बोर्ड का कहना है कि रिजल्ट घोषित करने के लिए किस ‘फॉर्मूले’ या असेसमेंट स्कीम का इस्तेमाल होगा, इसकी जानकारी बाद में अलग से साझा की जाएगी. मुमकिन है कि पिछली परीक्षाओं या इंटरनल मार्किंग के आधार पर कोई रास्ता निकाला जाए.
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16 दिन से जारी है बारूद की बारिश
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही इस जंग का आज 16वां दिन है. यह संघर्ष अब एक मानवीय त्रासदी में बदल चुका है. हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और लाखों बेघर हो गए हैं. न सिर्फ शिक्षा, बल्कि ग्लोबल टूरिज्म और ट्रैवल सेक्टर की भी कमर टूट गई है. दुनिया का कोई भी बड़ा देश अब तक ठोस तरीके से युद्ध रोकने की अपील करता नहीं दिख रहा है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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