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इंडिगो हर महीने करेगी 100 पायलटों की भर्ती; आसमान में करियर बनाने का सुनहरा मौका, जानें कैसे मिलता है कमर्शियल पायलट लाइसेंस

अगर आप भी पायलट बनकर बादलों की सैर करना चाहते हैं, तो यह सही वक्त है. इंडिगो ने अगले कुछ महीनों तक हर माह 100 पायलट भर्ती करने का एलान किया है. जानें 12वीं साइंस के बाद CPL लाइसेंस पाने का पूरा प्रोसेस और चयन प्रक्रिया.

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IndiGo Pilot Hiring: भारतीय आसमान में इन दिनों हलचल तेज है. अगर आपका सपना भी बादलों के बीच उड़ान भरने का है, तो आपके लिए इससे बेहतर वक्त नहीं हो सकता. देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) ने एलान किया है कि वह अगले कुछ समय तक हर महीने 100 नए पायलटों की भर्ती करेगी. दरअसल, पिछले दिनों पायलटों की कमी की वजह से इंडिगो को अपनी कई उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं, जिसके बाद कंपनी अब इस संकट को जड़ से खत्म करने के मूड में है.

सिर्फ इंडिगो ही नहीं, एयर इंडिया भी अपने बेड़े में शामिल हो रहे नए विमानों के लिए पायलटों की फौज तैयार कर रही है. मजे की बात तो यह है कि अगले साल ‘अल हिंद एयर’, ‘फ्लाईएक्सप्रेस’ और ‘शंख एयरलाइन’ जैसी तीन नई कंपनियां भी उड़ान भरने को तैयार हैं. जाहिर है, पायलटों की डिमांड आसमान छूने वाली है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर एक आम युवा कमर्शियल पायलट कैसे बन सकता है? आइए, इस पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझते हैं.

शुरुआत कहां से करें?

पायलट बनने का सफर स्कूल के दिनों से ही शुरू हो जाता है. सबसे पहली शर्त यह है कि आपने 12वीं कक्षा साइंस स्ट्रीम (फिजिक्स और मैथ्स के साथ) से पास की हो. आपकी उम्र कम से कम 17 साल होनी चाहिए और आप भारतीय नागरिक या OCI कार्ड होल्डर होने चाहिए. इसके अलावा, आपकी अंग्रेजी पर पकड़ मजबूत होनी चाहिए, क्योंकि उड़ान के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से सारी बातचीत अंग्रेजी में ही होती है. साथ ही, शारीरिक और मानसिक रूप से आपका ‘फिट’ होना सबसे अनिवार्य शर्त है.

फ्लाइंग स्कूल तक पहुंचने का रास्ता

पायलट बनने के लिए आपको किसी अच्छे फ्लाइंग स्कूल में दाखिला लेना होता है. इसके लिए भारत में कुछ प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं हैं:

IGRUA: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी की प्रवेश परीक्षा.

NDA/AFCAT: अगर आप भारतीय वायु सेना के जरिए पायलट बनना चाहते हैं. इन परीक्षाओं को पास करने के बाद आपको प्रशिक्षण के लिए चुना जाता है.

लाइसेंस पाने का ‘कठिन’ सफर

फ्लाइंग स्कूल में दाखिला मिलने के बाद असली चुनौती शुरू होती है. यह प्रक्रिया कई चरणों में बंटी है:

मेडिकल टेस्ट: सबसे पहले DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) द्वारा निर्धारित क्लास-2 और क्लास-1 मेडिकल टेस्ट पास करना होता है.

फ्लाइंग ट्रेनिंग: यहां आपको विमान उड़ाना सिखाया जाता है. आपको सोलो फ्लाइट (अकेले उड़ान), नाइट फ्लाइंग और एक शहर से दूसरे शहर (क्रॉस-कंट्री) उड़ान भरने का अनुभव लेना होता है.

लिखित परीक्षा: उड़ान के साथ-साथ आपको नेविगेशन, मौसम विज्ञान (Metrology) और विमान के तकनीकी नियमों पर आधारित DGCA की परीक्षाएं पास करनी होती हैं.

स्किल टेस्ट: अंत में एक इंस्ट्रक्टर आपकी उड़ान कौशल की जांच करता है. जब आप निर्धारित घंटों की उड़ान पूरी कर लेते हैं, तब आपको मिलता है ‘कमर्शियल पायलट लाइसेंस’ (CPL).

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नौकरी कैसे मिलेगी?

लाइसेंस हाथ में आने का मतलब यह नहीं कि आप सीधे कॉकपिट में बैठ जाएंगे. इसके बाद एयरलाइंस अपनी जरूरत के हिसाब से वैकेंसी निकालती हैं. कंपनियां दो तरह से भर्ती करती हैं:

कैडेट पायलट प्रोग्राम: इसमें नए लाइसेंस धारकों को लिया जाता है. पहले साइकोमेट्रिक टेस्ट होता है, फिर इंटरव्यू और अंत में सिम्युलेटर पर आपकी काबिलियत देखी जाती है. चयन के बाद कंपनी आपको विशेष विमान (जैसे A320 या बोइंग 737) उड़ाने की ‘टाइप रेटिंग’ ट्रेनिंग देती है.

अनुभवी पायलट: जिन पायलटों के पास पहले से उड़ान का अनुभव और टाइप रेटिंग होती है, उन्हें सीधे इंटरव्यू और मेडिकल के आधार पर सीनियर पदों पर रखा जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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