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पूर्व अग्निवीरों को 20% आरक्षण और राशन डिपुओं में महिलाओं को 33% कोटा, सरकार ने लिए कई बड़े फैसले

नायब सैनी सरकार ने हरियाणा के युवाओं और महिलाओं के लिए राहत का पिटारा खोल दिया है. पूर्व अग्निवीरों के लिए नौकरियों में कोटा बढ़ाकर दोगुना किया गया है, वहीं राशन डिपो के लाइसेंस में अब हर तीसरा हिस्सा महिलाओं का होगा. जानें कैबिनेट के सभी बड़े फैसले.

Agniveer Policy, Women Empowerment

Agniveer Reservation: हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने चुनाव से पहले मास्टरस्ट्रोक खेलते हुए कैबिनेट बैठक में बड़े फैसलों की झड़ी लगा दी है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पूर्व अग्निवीरों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए राहत के पिटारे खोले गए हैं. आइए जानते हैं कि इन फैसलों का आपकी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा.

अग्निवीरों के लिए 20% आरक्षण

सरकार ने ‘अग्निवीर नीति-2024’ को हरी झंडी दे दी है. सबसे बड़ी खबर यह है कि अब पूर्व अग्निवीरों को फॉरेस्ट गार्ड, जेल वार्डर और माइनिंग गार्ड जैसे पदों पर 20 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. पहले यह कोटा सिर्फ 10 प्रतिशत था, जिसे अब दोगुना कर दिया गया है. सरकार का मानना है कि सेना से ट्रेनिंग लेकर आए इन युवाओं के अनुशासन और कौशल का इस्तेमाल पुलिस और सुरक्षा सेवाओं में बेहतर तरीके से किया जा सकेगा.

राशन डिपुओं में महिलाओं का दबदबा

महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कैबिनेट ने उचित मूल्य की दुकानों (राशन डिपुओं) के लाइसेंस में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है. यानी अब हर तीसरा राशन डिपो किसी महिला के नाम होगा. इसमें एसिड अटैक सर्वाइवर्स, विधवाओं और एकल माताओं को प्राथमिकता दी जाएगी.

लाइसेंस के लिए शर्तें:

आवेदक का 12वीं पास होना और कंप्यूटर का ज्ञान होना जरूरी है.

उम्र 21 से 45 साल के बीच होनी चाहिए.

आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और ‘सरल पोर्टल’ के जरिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा.

बुजुर्गों के लिए ‘रिटायरमेंट हाउसिंग’ में बदलाव

बदलते दौर में बुजुर्गों की जरूरतों को समझते हुए सरकार ने ‘रिटायरमेंट हाउसिंग पॉलिसी’ में भी सुधार किए हैं. अब इन कॉलोनियों में ज्यादा एफएआर (FAR) मिलेगा, जिसका मतलब है कि बुजुर्गों के लिए बेहतर सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकेगा. एफएआर को 2.25 से बढ़ाकर 3.0 कर दिया गया है.

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गांव की शामलात भूमि और कानूनी सुधार

एक और महत्वपूर्ण फैसले में सरकार ने निजी प्रोजेक्ट्स के लिए गाँव की ‘शामलात देह’ (साझा जमीन) से रास्ता देने के नियमों को आसान बना दिया है. अगर किसी प्रोजेक्ट के पास रास्ता नहीं है, तो पंचायत और ग्राम सभा के बहुमत से रास्ता निकाला जा सकेगा. बदले में, डेवलपर को विकसित जमीन का एक हिस्सा पंचायत को देना होगा.

साथ ही, कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ‘पंजाब कोर्ट्स एक्ट-1918’ में संशोधन किया गया है. पुराने पड़ चुके कानूनों (1865 और 1881 के एक्ट) की जगह अब ‘इंडियन सक्सेशन एक्ट-1925’ को शामिल किया गया है, ताकि अदालती कार्यवाही और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में कोई उलझन न रहे.

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-भारत एक्सप्रेस



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