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अब एयरफोर्स के हवाले होंगे नीट के क्वेश्चन पेपर! पेपर लीक रोकने के लिए सरकार का मेगा प्लान; जानें अब तक कैसे होती थी सप्लाई

NEET-UG विवाद पर पीएमओ (PMO) की पैनी नजर है. पेपर लीक के लूपहोल्स को बंद करने के लिए सरकार अब पारंपरिक कूरियर सर्विस के बजाय मिलिट्री ग्रेड सुरक्षा अपनाने की तैयारी में है. इसके तहत छपाई से लेकर मुख्य केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने की जिम्मेदारी एयरफोर्स को सौंपी जा सकती है.

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NEET Exam Security: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में पेपर लीक और धांधली की खबरों ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है. लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर अब केंद्र सरकार पूरी तरह से ‘डैमेज कंट्रोल’ के मूड में आ गई है. बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) खुद इस पूरे मामले पर पैनी नजर रख रहा है. सरकार इस बार सुरक्षा व्यवस्था में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. यही वजह है कि नीट की दोबारा होने वाली परीक्षा के लिए क्वेश्चन पेपर्स को सुरक्षित परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने और उनकी पुख्ता सुरक्षा के लिए भारतीय वायु सेना (IAF) को तैनात करने पर गंभीर चर्चा चल रही है.

अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर अब तक यह पेपर कैसे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचते थे और इस बार वायु सेना को याद करने की नौबत क्यों आ गई? आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं.

अब तक कैसे होती थी पेपर्स की सप्लाई?

अब तक नीट परीक्षा के प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए एक ट्रेडिशनल और गोपनीय तरीका अपनाया जाता था, जो मुख्य रूप से सिविल सिस्टम (नागरिक प्रणालियों) पर निर्भर था. इसकी प्रक्रिया कुछ इस तरह होती थी.

सबसे पहले पेपरों की छपाई देश की कुछ बेहद गोपनीय और सुरक्षित प्रिंटिंग प्रेस में की जाती थी, जहां बाहरी लोगों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित होता था.

छपाई पूरी होने के बाद इन सीलबंद पैकेटों को देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में भेजने के लिए प्राइवेट कूरियर कंपनियों, कमर्शियल लॉजिस्टिक्स या सुरक्षित वाहनों की मदद ली जाती थी.

तय शहरों में पहुंचने के बाद इन पेपर्स को सीधे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) या अन्य सरकारी बैंकों के सुरक्षित स्ट्रांग रूम में ताले के अंदर रख दिया जाता था.

परीक्षा वाले दिन सुबह-सुबह इन पेपर्स को बैंक से निकालकर स्थानीय पुलिस की सुरक्षा में एग्जाम सेंटर्स तक पहुंचाया जाता था.

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वायु सेना को क्यों दी जा रही है जिम्मेदारी?

इस पारंपरिक व्यवस्था में सुरक्षा तो होती थी, लेकिन सरकार को लगता है कि प्राइवेट कूरियर और नागरिक परिवहन व्यवस्था में कुछ ऐसी कमियां (लूपहोल्स) हैं, जिनका फायदा उठाकर पेपर लीक करने वाले गिरोह सेंध लगा देते हैं. जांच अधिकारियों का भी मानना है कि पेपर लीक होने का सबसे ज्यादा खतरा उसी वक्त होता है जब पेपर रास्ते में हो या फिर कोई बाहरी व्यक्ति इसे हैंडल कर रहा हो. इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए अब वायु सेना को मैदान में उतारने की तैयारी है. इसके पीछे दो सबसे बड़े कारण हैं.

भारतीय वायु सेना का सुरक्षा तंत्र देश में सबसे मजबूत माना जाता है. इनके विमानों, बेस और जवानों की गतिविधियों पर कई स्तरों की सैन्य निगरानी होती है. ऐसे सख्त माहौल में किसी बाहरी व्यक्ति के लिए पेपर के साथ छेड़छाड़ करना या उस तक पहुंचना नामुमकिन के बराबर है.

जब कस्टडी सीधे एयरफोर्स के हाथों में होगी, तो प्रिंटिंग प्रेस से लेकर मुख्य वितरण केंद्रों तक पेपर सुरक्षित हाथों में रहेंगे. बीच में कोई भी प्राइवेट एजेंसी या बिचौलिया शामिल नहीं होगा, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी. सरकार का यह कदम देश के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों का भरोसा दोबारा जीतने की एक बड़ी कोशिश है.

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-भारत एक्सप्रेस



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