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JEE और NEET में बड़ा बदलाव संभव, सरकार One Nation One Exam मॉडल पर कर रही विचार; पेपर लीक विवाद के बाद सख्ती

JEE और NEET परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की चर्चा तेज है. सरकार एक यूनिफाइड एंट्रेंस एग्जाम मॉडल पर विचार कर रही है ताकि परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके.

JEE, NEET, One Nation One Exam

One Nation One Exam: देश की सबसे अहम प्रवेश परीक्षाओं जेईई मेन और नीट को लेकर बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है. हाल ही में सामने आए पेपर लीक विवादों के बाद केंद्र सरकार परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है. इसी कड़ी में अब एक नए “यूनिफाइड एंट्रेंस एग्जाम” मॉडल की संभावना जताई जा रही है.

एक देश, एक परीक्षा मॉडल पर फोकस

सूत्रों के मुताबिक सरकार “One Nation One Exam” मॉडल पर काम करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं को एक ही राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के दायरे में लाया जा सकता है. यानी एक कॉमन एग्जाम होगा, लेकिन छात्रों की स्ट्रीम के हिसाब से अलग-अलग सेक्शन बनाए जाएंगे.

इस प्रस्तावित ढांचे में इंजीनियरिंग उम्मीदवारों के लिए मैथ्स को प्रमुख सेक्शन में रखा जा सकता है, जबकि मेडिकल छात्रों के लिए बायोलॉजी अलग सेक्शन होगा. वहीं फिजिक्स और केमिस्ट्री दोनों के लिए कॉमन विषय हो सकते हैं.

परीक्षा प्रणाली को बनेगी ज्यादा सुरक्षित

सरकार का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और सुरक्षित बनाना बताया जा रहा है. पिछले कुछ सालों में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों की घटनाओं ने सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं, जिसके बाद सुधार की जरूरत और बढ़ गई है.

यह पूरा विचार पूर्व ISRO प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली हाई लेवल कमेटी की सिफारिशों से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है. इस कमेटी का गठन NEET-UG 2024 से जुड़े विवाद के बाद किया गया था, ताकि राष्ट्रीय परीक्षाओं में सुधार के सुझाव दिए जा सकें.

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NTA पर भी उठे सवाल

परीक्षाओं के संचालन को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. अब सरकार परीक्षा संचालन प्रणाली को और मजबूत करने, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है.

बता दें कि NEET-UG 2026 परीक्षा में 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया था. लेकिन परीक्षा के बाद पेपर लीक के आरोप सामने आने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया. इसके चलते परीक्षा को रद्द कर पुनः परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है, जो 21 जून को आयोजित की जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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