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‘ठुकराकर मेरा प्यार, मेरा इंतकाम…’ UPSC क्रैक कर फिल्मी स्टाइल में दिया जज्बा, कौन हैं उत्कर्ष जिसने रच दी मिसाल?

Utkarsh Srivastava UPSC Success Story: ग्रेजुएशन में 49% अंक, PCS में कई असफलताएं और ब्रेकअप के बाद भी उत्कर्ष श्रीवास्तव ने हार नहीं मानी. UPSC CSE 2024 के पांचवें प्रयास में उन्होंने AIR 498 हासिल की और IRS (C&IT) सेवा प्राप्त की.

 Utkarsh Srivastava UPSC Success Story

 Utkarsh Srivastava UPSC Success Story- AI Generated

 Utkarsh Srivastava UPSC Success Story: राजकुमार राव और कृति खरबंदा की फिल्म ‘शादी में जरूर आना’ का डायलॉग ‘ठुकराकर मेरा प्यार, मेरा इंतकाम देखेगी’ सोशल मीडिया और युवाओं के बीच आज भी खूब चर्चित है. फिल्म में यह डायलॉग एक ऐसे किरदार की कहानी का हिस्सा है, जो ठुकराए जाने के बाद खुद को बदलता है और अपनी कामयाबी से जवाब देता है. असल जिंदगी में उत्कर्ष श्रीवास्तव की कहानी भी संघर्ष और खुद को साबित करने के जज्बे से भरी है. फर्क सिर्फ इतना है कि उत्कर्ष ने किसी व्यक्ति से बदला लेने के बजाय अपनी असफलताओं, कमजोरियों और आलोचनाओं को अपनी मेहनत से जवाब दिया. ग्रेजुएशन में महज 49 प्रतिशत अंक, बैकलॉग के कारण बैकबेंचर का टैग, PCS प्रीलिम्स में 5-6 बार असफलता, यूपी पुलिस जेल वार्डेन भर्ती की दौड़ में सिर्फ 7 सेकंड से चूक और निजी जिंदगी में ब्रेकअप… उत्कर्ष के सफर में ऐसे कई मोड़ आए, जहां कोई भी व्यक्ति हार मान सकता था. लेकिन उन्होंने रुकने के बजाय तैयारी जारी रखी. आखिरकार UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में अपने पांचवें प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और ऑल इंडिया रैंक 498 प्राप्त की.

 49 फीसदी नंबर से शुरू हुई कहानी

उत्कर्ष की शुरुआती पढ़ाई का रिकॉर्ड ऐसा नहीं था, जिसे देखकर कोई यह अनुमान लगा सके कि वह आगे चलकर UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करेंगे. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि 10वीं में उन्हें 62 प्रतिशत और 12वीं में करीब 74 प्रतिशत अंक मिले थे. ग्रेजुएशन के दौरान बैकलॉग आने के बाद कई लोग उन्हें बैकबेंचर कहने लगे. बीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका ओवरऑल प्रतिशत करीब 49 रहा. लेकिन कम अंक उनके लिए मंजिल तय करने वाले नहीं थे. उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने का फैसला किया और धीरे-धीरे अपना लक्ष्य बड़ा करते चले गए.

कौन हैं उत्कर्ष जिसने रच दी मिसाल?

उत्कर्ष ने गोरखपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. उनकी पढ़ाई हिंदी मीडियम से हुई. UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने किताबों का ढेर लगाने के बजाय चुनिंदा किताबों और बेसिक कॉन्सेप्ट पर फोकस किया. भारतीय राजनीति की तैयारी के लिए उन्होंने एम. लक्ष्मीकांत की किताब पढ़ी, जबकि विषयों की बुनियाद मजबूत करने के लिए NCERT को महत्व दिया. उनका जोर सिर्फ पढ़ने पर नहीं, बल्कि कॉन्सेप्ट को समझने और उन्हें परीक्षा के लिहाज से इस्तेमाल करने पर रहा.

 PCS में 5-6 बार मिली असफलता

UPSC की सफलता तक पहुंचने से पहले उत्कर्ष को लगातार नाकामियों का सामना करना पड़ा. उनके इंटरव्यू के मुताबिक, वह PCS प्रीलिम्स में करीब 5-6 बार असफल हुए. एक के बाद एक असफलता के बावजूद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं छोड़ी. यह दौर उनके लिए निजी स्तर पर भी आसान नहीं था. उनकी गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप हुआ और रिश्ता खत्म हो गया. व्यक्तिगत परेशानी और प्रतियोगी परीक्षाओं की असफलताओं का यह दौर मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण रहा होगा, लेकिन उत्कर्ष ने इन परिस्थितियों को अपने लक्ष्य पर हावी नहीं होने दिया. परिवार के समर्थन ने भी उनके संघर्ष के दौरान उनका हौसला बनाए रखा.

7 सेकंड की चूक ने दिखाया बड़ा सपना

उत्कर्ष की जिंदगी में यूपी पुलिस जेल वार्डेन भर्ती की शारीरिक परीक्षा भी एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आई. दौड़ पूरी करने के दौरान वह महज 7 सेकंड के अंतर से पीछे रह गए और भर्ती का मौका हाथ से निकल गया. लेकिन इसी घटना ने उनके भीतर एक बड़ा लक्ष्य पैदा किया. वहां एक IPS अधिकारी को देखकर उनके मन में भी सिविल सेवा में जाने का विचार मजबूत हुआ. इसके बाद उन्होंने UPSC को लेकर अपनी तैयारी को और गंभीरता से आगे बढ़ाया.

 पांचवें प्रयास में मिला सबसे बड़ा जवाब

लगातार असफलताओं के बाद उत्कर्ष ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में अपना पांचवां प्रयास दिया. इस बार मेहनत रंग लाई और उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 498 हासिल की. उनकी सफलता इस मायने में भी खास रही कि जिस उम्मीदवार के ग्रेजुएशन में सिर्फ 49 प्रतिशत अंक थे, उसने देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल UPSC में अपनी जगह बना ली. बाद के सेवा आवंटन रिकॉर्ड में उन्हें IRS (C&IT), यानी Indian Revenue Service, Customs & Indirect Taxes आवंटित की गई. इस तरह उनका लंबा संघर्ष ग्रुप-A सेवा तक पहुंचने के साथ एक नए मुकाम पर पहुंच गया.

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 ‘इंतकाम’ किसी से नहीं, हालात से

उत्कर्ष की कहानी को अगर ‘शादी में जरूर आना’ के चर्चित डायलॉग के अंदाज में देखें तो उनका “इंतकाम” किसी इंसान से नहीं था. उन्होंने उन तमाम परिस्थितियों को जवाब दिया, जिन्होंने उन्हें कमजोर समझने की कोशिश की. जिसे कभी बैकबेंचर कहा गया, जिसके ग्रेजुएशन में 49 प्रतिशत अंक आए, जो PCS में कई बार असफल हुआ और पुलिस भर्ती में महज 7 सेकंड से चूक गया, वही उम्मीदवार पांचवें प्रयास में UPSC में AIR 498 तक पहुंचा. उनकी कहानी युवाओं को यही संदेश देती है कि कम अंक आपकी क्षमता का अंतिम प्रमाण नहीं होते और असफल प्रयास आपकी मंजिल तय नहीं करते. कभी-कभी जिंदगी में सबसे बड़ा जवाब किसी को हराना नहीं, बल्कि खुद को उस मुकाम तक पहुंचाना होता है जहां आपकी सफलता ही आपकी पहचान बन जाए.

भारत एक्सप्रेस



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