Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

यूपी सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी डॉक्टरों को सुपर स्पेशियलिटी पढ़ाई का मौका, जानें आयु सीमा, अनुभव और सख्त शर्तें

UP Medical News: यूपी के सरकारी डॉक्टर अब पीजी के बाद सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई कर सकेंगे. सरकार ने 10 साल की अनिवार्य सेवा और 1 करोड़ रुपये के बॉन्ड के साथ नए नियम जारी किए हैं.

Yogi Govt

UP Medical News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग (PMHS) के सरकारी डॉक्टर अब स्नातकोत्तर (PG) के बाद आगे की उच्च स्तरीय पढ़ाई और सुपर स्पेशियलिटी कोर्स कर सकेंगे. उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देशों के बाद इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी डॉक्टरों को उच्च शिक्षा और सुपर स्पेशियलिटी कोर्स करने की अनुमति देकर स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा सुधार किया है. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना है. हालांकि, योजना के साथ 10 साल की अनिवार्य सरकारी सेवा और 1 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बॉन्ड जैसी शर्तें भी जोड़ी गई हैं ताकि डॉक्टर पढ़ाई के बाद सरकारी व्यवस्था छोड़कर न जाएं.

सरकारी अस्पतालों को मिलेंगे सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी द्वारा नया आदेश जारी किया गया है. इस फैसले के लागू होने से आने वाले दिनों में आम जनता को सरकारी अस्पतालों में ही सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे मरीजों को निजी या बड़े अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.

दाखिले के लिए पात्रता और शर्तें

NEET प्रवेश परीक्षा के जरिए उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी. हालांकि, इसके लिए डॉक्टरों की प्रोबेशन अवधि पूरी होना, स्थायीकरण आदेश जारी होना और सर्विस रिकॉर्ड साफ-सुथरा होना अनिवार्य है. जिन डॉक्टरों के खिलाफ कोई विभागीय जांच, सतर्कता मामला या आपराधिक केस लंबित होगा, वे इसके पात्र नहीं होंगे. साथ ही, आवेदन वर्ष से पहले के वर्ष की 31 दिसंबर तक डॉक्टर की अधिकतम आयु 45 वर्ष तय की गई है. एडमिशन के समय एमबीबीएस और पीजी की मूल डिग्रियां जमा करानी होंगी.

10 साल की सेवा और 1 करोड़ रुपये का बॉन्ड

सरकार ने डॉक्टरों को उच्च शिक्षा का अवसर देने के साथ ही सरकारी सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए सख्त शर्त रखी है. पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर को कम से कम 10 वर्षों तक सरकारी अस्पताल में सेवा देनी होगी. यदि कोई डॉक्टर इस शर्त का उल्लंघन करता है, तो उसे 1 करोड़ रुपये का जुर्माना/बॉन्ड भरना होगा. इसके अलावा, बीच में पढ़ाई छोड़ने पर अगले 5 साल तक किसी अन्य उच्च कोर्स में प्रवेश नहीं मिलेगा और तीन बार परीक्षा में असफल होने पर दोबारा परीक्षा देने के लिए शासन से मंजूरी लेनी होगी.

दोबारा पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों के लिए अलग नियम

पहली बार उच्च शिक्षा की अनुमति पाने वाले डॉक्टरों को 2 साल का सवेतन अध्ययन अवकाश और 1 साल का बिना वेतन असाधारण अवकाश दिया जाएगा. वहीं, जो डॉक्टर पहले भी पीजी कर चुके हैं, उन्हें नई अनुमति से पहले अपनी पुरानी 10 साल की अनिवार्य सेवा में से कम से कम 5 साल पूरे करने होंगे. ऐसे डॉक्टरों को कुल 15 साल सरकारी सेवा देनी होगी और इस दौरान बिना सैलरी का असाधारण अवकाश मिलेगा.

यह भी पढ़ें-CBSE Board Exam 2027: 10वीं-12वीं की डेटशीट जारी, 16 फरवरी से शुरू होंगी परीक्षाएं

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital