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ट्रंप को भाया भारत का वोटर ID! जानिए अमेरिका से चीन तक कैसे होती है वोटरों की पहचान

Voter ID System in World: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी फर्जीवाड़ा रोकने के लिए भारतीय वोटर आईडी (EPIC) मॉडल की पैरवी की है. जानिए अमेरिका, यूरोप, मेक्सिको, जापान और चीन में मतदान के लिए मतदाताओं की पहचान कैसे की जाती है?

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दुनिया में वोटर पहचान के नियम, फोटो- भारत एक्सप्रेस @AI

Voter ID System in World: दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका में चुनावी व्यवस्था और फर्जीवाड़े को लेकर बहस छिड़ गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में चुनाव सुधार और धांधली रोकने के लिए भारतीय वोटर आईडी मॉडल की खुलकर वकालत की है. ट्रंप ने हर अमेरिकी मतदाता के लिए अनिवार्य पहचान पत्र लागू करने की मांग की है. भारत में जहां चुनाव आयोग का 10-अंकों वाला फोटो पहचान पत्र हर मतदाता के लिए मानक दस्तावेज है, वहीं अमेरिका समेत दुनिया के कई बड़े देशों में वोटिंग के लिए पहचान के नियम बेहद अलग और हैरान करने वाले हैं.

अमेरिका में क्यों नहीं है कोई ‘सेंट्रल वोटर ID’? (Why USA Dont Have Voter ID)

अमेरिका में भारत, मेक्सिको या यूरोप जैसा कोई केंद्रीय नेशनल आईडी सिस्टम या राष्ट्रीय वोटर आईडी व्यवस्था नहीं है. वहां का संविधान राज्यों को अपने मतदान नियम खुद तय करने का अधिकार देता है.

फोटो आईडी वाले राज्य: कई राज्य ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या स्टेट आईडी मांगते हैं.

गैर-फोटो आईडी वाले राज्य: कुछ राज्यों में बिजली बिल या बैंक स्टेटमेंट दिखाकर भी वोट डाला जा सकता है.

बिना किसी आईडी के वोटिंग: कई राज्यों और वॉशिंगटन डीसी में पोलिंग बूथ पर कोई भी आईडी नहीं मांगी जाती; वहां केवल हस्ताक्षर के मिलान या पुराने रिकॉर्ड के आधार पर वोट डालने दिया जाता है.

यूरोप से जापान और चीन तक कैसा है सिस्टम?

यूरोपीय देश: ब्रिटेन को छोड़कर लगभग सभी यूरोपीय देशों में सरकार द्वारा जारी फोटो वोटर आईडी दिखाना अनिवार्य है. अब ब्रिटेन भी धीरे-धीरे अनिवार्य फोटो-आईडी के नियम की तरफ बढ़ चुका है.

मेक्सिको: यहां नेशनल इलेक्टोरल इंस्टीट्यूट (INE) 18 साल से ऊपर के हर नागरिक को ‘वोटर क्रेडेंशियल’ कार्ड देता है. इसमें फोटो, फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक्स और तीन QR कोड होते हैं, जो बैंकिंग और यात्रा में भी काम आते हैं.

जापान: जापान में कोई फोटो आईडी नहीं दिखाई जाती. चुनाव से पहले मतदाताओं को उनके पते पर डाक/ईमेल के जरिए ‘पोलिंग एंट्रेंस टिकट’ भेजा जाता है. पोलिंग बूथ पर अफसर इस टिकट को स्कैन करके वोट डलवाते हैं.

चीन: यहां मतदान के लिए ‘रेजिडेंट आईडी’ का उपयोग होता है, जिसमें बायोमेट्रिक डेटा दर्ज होता है. चुनाव से पहले स्थानीय समितियां घर-घर जाकर इस डेटाबेस को अपडेट करती हैं.

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1993 से रोल मॉडल बना भारतीय सिस्टम (India Voter ID Card)

भारत में मतदान सूची की शुरुआत 1951-52 के पहले आम चुनाव से ही हो गई थी, लेकिन उस समय केवल मतदाता सूची में नाम देखकर वोट डाले जाते थे. चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 1993 में फोटो पहचान पत्र यानी EPIC की शुरुआत की. आज 140 करोड़ की आबादी वाले देश में यह कार्ड फर्जी मतदान रोकने का सबसे अचूक हथियार साबित हुआ है, और यही वजह है कि आज अमेरिका जैसे महाशक्ति देश के राष्ट्रपति भी भारत के इस मॉडल की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं.



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