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कांग्रेस, वाम और फिर तृणमूल कांग्रेस… पश्चिम बंगाल के लिए कैसा रहा चुनावी इतिहास?

West Bengal assembly elections history: पश्चिम बंगाल की राजनीति का सफर कांग्रेस से शुरू होकर वाम मोर्चे के लंबे शासन और फिर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस तक पहुंचा है. विधानसभा चुनावों के इतिहास ने राज्य की राजनीति को बार‑बार नई दिशा दी है.

West Bengal assembly elections history: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का इतिहास बताता है कि राज्य की राजनीति हमेशा उतार‑चढ़ाव से भरी रही है. कांग्रेस से शुरू होकर वाम मोर्चे के लंबे शासन तक और फिर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के उदय तक.

शुरुआती दौर (1952-1972)

  • 1952 का पहला चुनाव: स्वतंत्र भारत में पश्चिम बंगाल का पहला विधानसभा चुनाव हुआ. कांग्रेस ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाई.
  • 1967 और 1969: वामपंथी दलों ने गठबंधन बनाकर कांग्रेस को चुनौती दी. कई बार सरकारें बनीं और गिरीं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता दिखी.
  • 1972: कांग्रेस ने फिर से सत्ता में वापसी की लेकिन यह आखिरी बार था जब उन्होंने राज्य पर मजबूत पकड़ बनाई.

वाम मोर्चे का दौर (1977-2011)

  • 1977: वाम मोर्चा (CPI(M) के नेतृत्व में) ने भारी जीत दर्ज की और ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने.
  • ज्योति बसु का शासन: 23 साल तक लगातार मुख्यमंत्री रहे, जिसने उन्हें भारत के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल किया.
  • 2000 में बदलाव: बुद्धदेव भट्टाचार्य मुख्यमंत्री बने और वाम मोर्चे ने 2011 तक सत्ता संभाली.

इस दौर में भूमि सुधार और पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वाम मोर्चा जाना गया लेकिन बाद के वर्षों में उद्योग नीति और सिंगूर‑नंदीग्राम विवाद ने उनकी लोकप्रियता घटा दी.

ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (2011-अब तक)

  • 2011: ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और वाम मोर्चे के 34 साल लंबे शासन का अंत किया.
  • 2016 और 2021: ममता ने लगातार जीत हासिल की और अपनी पकड़ मजबूत की.
  • 2026 चुनाव: ताज़ा रुझानों में बीजेपी और टीएमसी के बीच कड़ा मुकाबला है, लेकिन ममता अब भी बंगाल की राजनीति की सबसे बड़ी शख्सियत बनी हुई हैं.

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पश्चिम बंगाल की राजनीति का सफर कांग्रेस से शुरू होकर वाम मोर्चे के लंबे शासन और फिर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस तक पहुंचा है. आज भी बंगाल की राजनीति में ममता का नाम निर्णायक है, और उनका उदय राज्य की राजनीतिक संस्कृति में सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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