West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में जहां हर सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है, वहीं उत्तर बंगाल से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए एक बेहद शानदार और रिकॉर्ड तोड़ खबर आई है. माथाभांगा (Mathabhanga) विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष निशिथ प्रमाणिक (Nisith Pramanik) ने टीएमसी को ऐसी करारी शिकस्त दी है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा. प्रमाणिक ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को लगभग 50 हजार से अधिक वोटों के विशाल अंतर से पीछे छोड़ दिया है, जो इस चुनाव में बीजेपी की सबसे बड़ी जीतों में से एक मानी जा रही है.
माथाभांगा में निशिथ की ‘सुनामी’ (Nisith Pramanik Mathabhanga Result)
20 राउंड की मतगणना के बाद सामने आए आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि माथाभांगा की जनता ने निशिथ प्रमाणिक पर एकतरफा प्यार लुटाया है:
- निशिथ प्रमाणिक (BJP): 1,32,740 वोट
- डॉ. सबलू बर्मन (TMC): 81,933 वोट
- खगेन चंद्र बर्मन (CPI-M): 3,563 वोट (तीसरे स्थान पर)
इन आंकड़ों के अनुसार, निशिथ प्रमाणिक टीएमसी के डॉ. सबलू बर्मन से 50,807 वोटों की एक ऐसी लीड ले चुके हैं, जिसे पाटना अब नामुमकिन है. यह जीत सिर्फ एक सीट की नहीं है, बल्कि यह निशिथ प्रमाणिक की राजनीतिक ‘कमबैक स्टोरी’ का सबसे शानदार अध्याय है.
देश के सबसे युवा मंत्री तक का सफर (west bengal election result 2026)
निशिथ प्रमाणिक का राजनीतिक करियर किसी बॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं है. उत्तर बंगाल में एक ग्रासरूट यूथ लीडर के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले निशिथ ने अपना सियासी सफर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) से ही शुरू किया था. वे कूचबिहार जिले में टीएमसी के एक प्रमुख युवा चेहरे थे.
लेकिन 2018 के पंचायत चुनाव उनके करियर का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुए. टीएमसी नेतृत्व से अनबन के बाद, उन्होंने बगावत कर दी और पंचायत चुनाव में टीएमसी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ लगभग 300 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतार दिए. इनमें से कई प्रत्याशियों ने शानदार जीत दर्ज की, जिसने निशिथ की जमीनी पकड़ का लोहा मनवा दिया.
इसके ठीक बाद, 28 फरवरी 2019 को उन्होंने नई दिल्ली में आधिकारिक तौर पर बीजेपी का दामन थाम लिया. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें कूचबिहार से टिकट दिया और उन्होंने टीएमसी के दिग्गज परेश चंद्र अधिकारी को 54,000 से ज्यादा वोटों से हराकर संसद में कदम रखा. उनकी इस लोकप्रियता का ही इनाम था कि 7 जुलाई 2021 को, महज 35 साल की उम्र में, उन्हें देश का सबसे युवा केंद्रीय मंत्री (MoS – गृह मंत्रालय और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय) बनाया गया.
2024 की हार का 2026 में लिया ‘बदला’ (west bengal assembly election results 2026)
निशिथ प्रमाणिक के करियर में उतार-चढ़ाव भी खूब रहे. 2021 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने दिनहाटा (Dinhata) सीट से जीत दर्ज की थी, लेकिन बीजेपी आलाकमान के निर्देश पर सांसद बने रहने के लिए उन्होंने कुछ ही दिनों बाद विधायकी से इस्तीफा दे दिया था. उनके सियासी सफर का सबसे मुश्किल दौर 4 जून 2024 को आया, जब लोकसभा चुनाव में वे टीएमसी के जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया से 39,000 से अधिक वोटों से चुनाव हार गए.
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लेकिन कहते हैं कि राजनीति में कोई भी हमेशा के लिए खत्म नहीं होता. 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी रणनीति बदली और माथाभांगा (SC) सीट से चुनावी मैदान में उतरे. आज के नतीजों ने साबित कर दिया है कि उत्तर बंगाल में निशिथ प्रमाणिक का तिलिस्म अभी टूटा नहीं है. 50 हजार से ज्यादा वोटों की इस बंपर लीड ने 2024 की उनकी हार के सारे दाग धो दिए हैं और बंगाल बीजेपी के भीतर उनके कद को एक बार फिर सबसे ऊंचे मुकाम पर ला खड़ा किया है.
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