Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

KBC14: भीलवाड़ा मंडी में बोरी ढोने वाले मोहसिन की तारीफ किए बिना नहीं रह पाए अमिताभ, मोहसिन ने जीते 6.40 लाख

KBC14

मोहसिन

Bhilwara :  राजस्थान के भीलवाड़ा (Bhilwara) की मंडी में मजदूरी करने वाले मोहसिन ने 9 साल पहले केबीसी (KBC) में अमिताभ बच्चन( Amitabh Bachchan) के सामने बैठने और इस खेल में लाखों जीतने का सपना देखा था जो पूरा हो गया है.

राजस्थान के भीलवाड़ा की मंडी में बोरी ढोने वाले मोहसिन, कौन बनेगा करोड़पति की हॉट सीट पर बैठे नजर आए, तो पूरा शहर खुशी से झूम उठा. गरीब परिवार में पले-बढ़े मोहसिन कृषि मंडी में बोरियां ढोते हैं. उम्मीद है अब उनकी किस्मत बदल जाएगी.  30 साल के मोहसिन 9 साल से इसी कोशिश में थे कि केबीसी में खेलने का मौका मिले.

बुधवार को एपिसोड प्रकाशित होने के बाद मोहसिन मीडिया के सामने आए और उन्होंने अपना अनुभव साझा किया. इस दौरान उन्होंने अपने जीवन में आए उतार-चढ़ाव के बारे में बताए. एक गरीब परिवार से लेकर KBC तक के सफर में आए संघर्षों को लेकर उनके चाहने वालों ने भी इस दौरान खुलकर बात की.

भीलवाड़ा शहर के भवानी नगर में रहने वाले मोहसिन चार बहनों के इकलौते भाई हैं. मंडी में पिता महबूब मंसूरी को बोरियां ढोते देख ये बड़े हुए हैं. विषम परिस्थितियों के बीच मोहसिन ने अपनी पढ़ाई जारी रखी. वो पोस्ट ग्रेजुएशन कर चुके हैं. पिछले 9 साल से पॉपुलर शो KBC में जाने का प्रयास कर रहे थे और आखिरकार उन्हें सफलता मिली और मोहसिन ने 6 लाख 40 हजार रुपये की राशि जीती.

KBC के सेट पर अमिताभ बच्चन के सामने बैठने का उन्हें मौका मिला है. मोहसिन एक मजदूर का बेटा है. वह समाज में इज्जत पाना चाहता है. गरीबी के कारण मोहसिन को खूब ताने सुनने पड़े हैं. लोगों ने यहां तक कहा है कि मजदूर का बेटा मजदूरी ही करेगा. KBC में सिलेक्ट होकर मोहसिन ने ऐसा कहने वालों को करारा जवाब दिया है.

मोहसिन कौन बनेगा करोड़पति के लिए 9 साल से तैयारी कर रहे थे. कई बार सिलेक्ट होने पर अलग-अलग पायदान पर आने के बाद रिजेक्ट हो जाया करते थे. एक महीने पहले उनके पास कौन बनेगा करोड़पति शो से कॉल आया और सिलेक्ट होने की बात बताई गयी.

मोहसिन कहते हैं कि दिनभर अगर हमाल को काम मिले तो 400 रुपए तक कमा सकता है. औसत मजदूरी 300 रुपए तक ही होती है. घंटों तक 50 किलोग्राम से भी ज्यादा वजन के कट्टों को उठाकर इधर – उधर करने से पूरा शरीर टूट जाता है. तब जाकर शाम को मजदूरी मिलती है.

मंडी में हर दिन काम मिलना संभव नहीं है. जब खरीफ और रबी की फसलों के मंडी में आने का समय होता है, तभी हमालों के लिए सीजन होता है. अभी मंडी में खरीफ की फसल आ रही है. इस कारण मजदूरी भरपूर है.

मोहसिन करीब 7 साल से भीलवाड़ा की कृषि मंडी में हमाल (पल्लेदारी) का काम कर रहे हैं. पिता महबूब मंसूरी भी इसी मंडी में बोरियां ढोते हैं. दादा रूस्तम मंसूरी भी यहीं बोरियां ढोते थे. हमाल एसोसिएशन के अध्यक्ष शंकरलाल ने बताया कि मोहसिन शुरू से मेहनती लड़का रहा है. बचपन से गरीबी में पला-बढ़ा है.  एक हमाल का बेटा KBC के मंच तक पहुंचा, ये भीलवाड़ा के लिए गौरव की बात है.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital