Bondi Beach Attack: सिडनी के मशहूर बोंडी बीच पर हुए दर्दनाक आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को दहला दिया है. हनुक्का उत्सव की खुशियों के बीच हुई इस गोलीबारी में 15 बेगुनाह लोगों ने अपनी जान गंवा दी. लेकिन इस खबर ने भारत, और खासकर हैदराबाद के लोगों को तब और भी ज्यादा चौंका दिया, जब जांच में यह बात सामने आई कि हमलावर बाप-बेटे की जोड़ी का गहरा नाता हैदराबाद से है.
सोशल मीडिया और न्यूज गलियारों में जैसे ही यह खबर फैली, हैदराबाद के टोलीचौकी इलाके का एक दो मंजिला मकान अचानक सुर्खियों में आ गया. लोग पूछ रहे हैं कि आखिर शांत रहने वाला एक पढ़ा-लिखा परिवार इस तरह के खौफनाक रास्ते पर कैसे चल पड़ा? आइए इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ते हैं और देखते हैं कि अब तक की जांच में क्या सच सामने आया है.
हमलावर का हैदराबाद कनेक्शन?
ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने साफ किया है कि हमलावर 50 वर्षीय साजिद अकरम और उसका 24 साल का बेटा नवीद अकरम है. साजिद का जन्म और पालन-पोषण हैदराबाद में ही हुआ था. उसने बी.कॉम की डिग्री ली और साल 1998 में बेहतर जिंदगी और काम की तलाश में ऑस्ट्रेलिया चला गया. वहां उसने एक यूरोपीय महिला से शादी की और वहीं बस गया.
तेलंगाना पुलिस के रिकॉर्ड्स खंगालने पर पता चला कि साजिद का भारत में रहने के दौरान कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है. वह एक सामान्य युवा था जो विदेश जाकर बस गया. लेकिन पिछले कुछ सालों में ऐसा क्या हुआ कि उसने अपने बेटे के साथ मिलकर इस नरसंहार को अंजाम दिया, यह अब भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है.
टोलीचौकी का वो ‘चर्चा वाला घर’
हैदराबाद के टोलीचौकी इलाके में अकरम का परिवार रहता है. जैसे ही हमले की खबर आई, वहां सन्नाटा पसर गया और घर पर ताला लटक गया. पड़ोसियों का कहना है कि यह परिवार बेहद शांत है और किसी से ज्यादा मतलब नहीं रखता. अकरम के भाई फिलहाल घर की देखरेख करते हैं.
हैरानी की बात यह है कि साजिद ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद अपने परिवार से काफी कट गया था. वह 1998 के बाद केवल 6 बार भारत आया, और वे भी उसकी निजी यात्राएं थीं. रिश्तों में दूरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2009 में जब उसके पिता का निधन हुआ, तब भी साजिद आखिरी विदाई देने भारत नहीं आया था.
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क्या हैदराबाद से जुड़ी हैं इसकी जड़ें?
तेलंगाना के डीजीपी बी. रेड्डी ने इस मामले पर स्थिति साफ करते हुए कहा कि साजिद और नवीद के कट्टरपंथी बनने के पीछे भारत या हैदराबाद का कोई स्थानीय प्रभाव नजर नहीं आता. यानी, इनका ब्रेनवॉश भारत में नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान ही हुआ होगा.
जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि नवीद 2019 में ही ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियों के रडार पर आ गया था. उस समय उसका नाम इस्लामिक स्टेट (IS) के कमांडर इसहाक अल मतारी के साथ जुड़ा था. हालांकि, उस वक्त एजेंसियों को लगा कि नवीद से कोई तत्काल खतरा नहीं है, जो शायद एक बड़ी चूक साबित हुई. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अकरम के पास 6 रजिस्टर्ड हथियारों के लाइसेंस भी थे, जिससे उनकी प्लानिंग की गंभीरता का पता चलता है.
बताते चलें कि फिलहाल, तेलंगाना पुलिस और भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के साथ लगातार तालमेल बिठा रही हैं. साजिद के भारत दौरों और यहां उसके संपर्कों की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोई स्लीपर सेल या स्थानीय मददगार तो इसमें शामिल नहीं था.
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– भारत एक्सप्रेस
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