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3 दिन, 15 द्विपक्षीय बैठकें: BRICS सम्मेलन में ‘मोदी डिप्लोमेसी’ की गूंज, जानिए बड़ी बातें

दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS समिट में भारत की कूटनीति का डंका बजा. 15 द्विपक्षीय वार्ताओं और ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ के साथ भारत ने आतंकवाद, व्यापार और ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर दुनिया को दिशा दिखाई.

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भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का सफल समापन हो गया. दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित इस दो दिवसीय महासम्मेलन में पूरी दुनिया ने भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव और ‘मोदी डिप्लोमेसी’ का लोहा माना. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महज तीन दिनों के भीतर 15 देशों के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं कर वैश्विक राजनीति में भारत की केंद्रीय भूमिका को साबित किया.

सम्मेलन के अंत में सभी सदस्य देशों की सहमति से ऐतिहासिक ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ जारी किया गया. इसके बाद पीएम मोदी द्वारा आयोजित भव्य रात्रिभोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.

भारत की ‘सफल मध्यस्थता’

इस बार ब्रिक्स की मेजबानी भारत के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण थी. एक तरफ जहां अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर था, वहीं ईरान का सऊदी अरब और यूएई से भी विवाद चल रहा था. इसके बावजूद भारत ने तीनों विरोधी देशों को एक मंच पर लाकर बिठाया. सम्मेलन के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति की पहल पर भी पुतिन की मुहर लगी, जबकि चीन ने भी माना कि यह समय आपसी मतभेद भूलकर साथ मिलकर काम करने का है.

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की प्रमुख बातें:

‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ पर आम सहमति: आतंकवाद, वैश्विक शासन और आर्थिक सुरक्षा पर सभी देशों ने साझा रुख अपनाया.

चीन और रूस के साथ अहम मुलाकातें: पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सीमा पर शांति व संबंधों को ‘रीसेट’ करने पर चर्चा हुई. वहीं राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मोदी की ‘कार डिप्लोमेसी’ ने पूरी दुनिया को गहरा राजनीतिक संदेश दिया.

आतंकवाद पर करारा वार: सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई और आतंकवाद को पनाह देने वाले देशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान किया गया.

डॉलर की निर्भरता घटाने पर जोर: ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार के लिए स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और वैकल्पिक पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा देने पर सहमति बनी.

एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध: सदस्य देशों ने अमेरिकी टैरिफ और आर्थिक दबावों का खुले मंच से विरोध किया.

ग्लोबल साउथ और UN सुधार: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता की दावेदारी मजबूत की.

अगली मेजबानी: 2027 में अगला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन चीन में आयोजित किया जाएगा.

यह भी पढ़ें: हाथ में हाथ डाले मोदी-पुतिन-जिनपिंग, ट्रंप की कोशिशों पर फिरा पानी, पुतिन ने शांति पहल को दी हरी झंडी?

-भारत एक्सप्रेस



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