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कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने स्वर्गीय राजेश राय को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि, बोले- दर्द को परिभाषित करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं

समाजसेवी स्वर्गीय श्री राजेश राय की दिवंगत आत्मा की शांति के लिए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सामूहिक गायत्री मंत्र और ओमकार का जाप कराया. वे बोले कि नियति का नियम स्पष्ट है- “जो आया है वो जाएगा.” फिर भी, मन इस दुख, वेदना, बिछोह और दर्द को स्वीकार नहीं करता.

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Vijay Ram Edited by Vijay Ram

नई दिल्ली, 11 नवंबर 2025: कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आज चिन्मय मिशन के तत्वावधान में एक भावपूर्ण प्रार्थना सभा में स्वर्गीय राजेश राय को सच्चर श्रद्धांजलि अर्पित की. स्वर्गीय राजेश राय, जो भारत एक्सप्रेस के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) उपेंद्र राय के बड़े भाई थे, उनके निधन पर आयोजित इस सभा में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने जीवन, मृत्यु और दुख की गहन व्याख्या की. उन्होंने उपस्थित सभा को आध्यात्मिक संदेश देते हुए कहा कि मृत्यु का दर्द एहसास से ही समझा जा सकता है, शब्दों से नहीं.

सभा में सीएमडी उपेंद्र राय और उनके परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, “जीवन पर बहुत कुछ कहा जा सकता है क्योंकि जीवन के बहुत सारे अनुभव हैं, लेकिन मित्र पर क्या कहा जाए? जिसने उसे देखा, वो अपना अनुभव शेयर करने के लिए लौटकर नहीं आता. नियति कहती है कि ये नियम है.”

उन्होंने डॉ. कुमार विश्वास द्वारा शास्त्र के दृष्टिकोण से रखी गई बातों का जिक्र करते हुए कहा कि शास्त्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना मुश्किल होता है, लेकिन नियति का नियम स्पष्ट है- “जो आया है वो जाएगा.” फिर भी, मन इस दुख, वेदना, बिछोह और दर्द को स्वीकार नहीं करता.

आचार्य जी के भावुक शब्द

आचार्य जी ने भावुक होकर कहा, “जब कोई व्यक्ति हमारे घर से जाता है और वो जानता है कि शाम को घर लौट आएगा, तब भी उसका जाना खलता है. लेकिन जब ये पता होता है कि जाने वाला कभी वापस नहीं आएगा, तो हमारी त्योह स्थिति क्या है?” उन्होंने उपेंद्र राय को संबोधित करते हुए कहा कि उनके भाई के निधन पर जो दर्द है, उसे परिभाषित करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं. “प्रेम की पूरी परिभाषा अभी तक नहीं की गई, वैसे ही दर्द को परिभाषित करने के लिए शब्द नहीं, एहसास चाहिए.”

आचार्य जी का प्रेरणादायक संदेश

प्राचीन ग्रंथों और महापुरुषों के उदाहरण देकर आचार्य जी ने सभा को प्रेरित किया. उन्होंने भगवान कृष्ण के गोकुल से बिछड़ने के दर्द का जिक्र किया, जहां दाह-दहाड़े नर रोते थे. श्रीराम के पिता दशरथ के निधन पर उनके रोने का वर्णन किया. इसी तरह, भगवान बुद्ध के प्रिय शिष्य आनंद के उदाहरण से बताया कि बुद्ध के जाने पर आनंद रो पड़े थे, कहते हुए कि “अब इस दुनिया में अंधेरा दिख रहा है, अब सबको रोशनी कौन दिखाएगा?”

बुद्ध ने उत्तर दिया, “मैंने तो जीवन में और मित्र का फर्क ही नहीं समझा. मेरे जाने के बाद अगर तुम रोते हो तो मेरा संदेश ही खो जाएगा.” फिर उन्होंने आनंद को “अप्प दीपो भव” का संदेश दिया- “अपना दीपो खुद बनो, जितना जलोगे उतनी ही रोशनी होगी.”

आचार्य जी की समय की नश्वरता पर बात

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, “इंसान की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि वो जानता है कि वो जाएगा, लेकिन मानता नहीं. वेद कहता है कि आत्मा न मरती है, न जलाई जाती है, न ढलाई जा सकती है. लेकिन फिर भी, वो दर्द तो होता है.” उन्होंने समय की नश्वरता पर जोर देते हुए कहा, “जब हमारे पास समय होता है तो हम उसका एहसास नहीं करते, और जैसे ही एहसास होता है, वैसे ही समय साथ छोड़ देता है. अगर संसार की पूरी सभ्यता एक पल में रख दी जाए और एक तरफ समय रख दिया जाए, तो भी कोई उस पल को वापस नहीं ला सकता.”

आचार्य जी का संदेश

सभा में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए आचार्य जी ने कहा कि हम सब यहां कुछ देर के लिए फूल चढ़ाने, हाथ जोड़ने और बोलने आएंगे, लेकिन उपेंद्र राय जी को जीवन भर का मलाल रहेगा कि वे अपने भाई को पर्याप्त समय नहीं दे पाए. उन्होंने उपेंद्र राय की मां को प्रणाम करते हुए कहा, “उपेंद्र राय जी जैसे भाई, जैसे भारत जैसे कोई भाई, मैं उस मां को प्रणाम करना चाहता हूं जिसने उन्हें जन्म दिया. जो अपने परिवार के सभी दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपनी अच्छाई और बुराई दोनों को स्वीकार किया.”

आचार्य जी की प्रार्थना सभा

अंत में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सामूहिक गायत्री मंत्र और ओमकार का जाप कराया. उन्होंने कहा, “हम प्रार्थना करते हैं कि परमात्मा उस सूक्ष्म स्वरूप को, जो ओम का नाद है, सद्गति प्रदान करें. इस परिवार को हमेशा अपनी कृपा के छत्र में रखें और इस दुख को सहने की शक्ति दें.” सभा को “प्रार्थना सभा” कहते हुए उन्होंने सामूहिक प्रार्थना का महत्व बताया, जो व्यक्तिगत प्रार्थना से कहीं अधिक प्रभावी होती है.

सीएमडी उपेंद्र राय और उनके परिवार के इस दुख की घड़ी में सभा में उपस्थित सभी मित्रों और गणमान्य व्यक्तियों ने एकजुट होकर समर्थन जताया. आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अंत में कहा, “हम सब इस परिवार के साथ हैं. आपकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि सब उनके साथ हैं.”

यह सभा चिन्मय मिशन के तत्वावधान में आयोजित की गई थी, जहां कवि डॉ. कुमार विश्वास ने भी शास्त्रीय दृष्टिकोण से अपनी बात रखी. राजेश राय के निधन से मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ गई है, और यह प्रार्थना सभा उनके योगदान को स्मरण करने का एक अवसर बनी.

  • भारत एक्सप्रेस


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