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मध्य प्रदेश में करोड़ों का खेल! खुद सामने आए ACS संजय दुबे ने क्या कहा? बताया एक-एक पैसे का हिसाब

ACS Sanjay Dubey On MP Urban Body Scam: वायरल वीडियो पर नगरीय प्रशासन विभाग के ACS संजय दुबे ने चुप्पी तोड़ी है. AI से पकड़ी गई खरीदी में धांधली के मामले में जानिए उन्होंने क्या-क्या जानकारी दी है?

ACS Sanjay Dubey On nagarpalika scam Madhya Pradesh

ACS Sanjay Dubey On MP Urban Body Scam: सरकारी फाइलों की आड़ में जब जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों की बंदरबांट होने लगे, तो अक्सर व्यवस्थाएं मौन नजर आती हैं. लेकिन मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन में इन दिनों तकनीक और सख्त तेवरों की ऐसी आंधी चली है. नगरीय निकायों में टेंडर और खरीदी प्रक्रिया में धांधली से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मचा है. ऐसे में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) आईएएस संजय दुबे ने खुद सामने आकर पूरा सच सामने रखा.

संजय दुबे ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो कोई लीक या आरोप नहीं, बल्कि लापरवाह अफसरों को आइना दिखाने के लिए आयोजित विशेष प्रशिक्षण सत्र का हिस्सा था. उन्होंने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि मोहन सरकार में ‘गुड गवर्नेंस’ केवल एक नारा नहीं है, बल्कि लापरवाही और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का कड़ा संकल्प है.

392 अफसरों पर गाज, करोड़ों की वसूली (Sanjay Dubey IAS action on CMO and engineers)

संजय दुबे के अनुसार, खरीदी और भुगतान में हेराफेरी करने वालों के खिलाफ विभाग की सख्त कार्रवाई लगातार जारी है. अलग-अलग स्तरों के कुल 392 कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है. कार्रवाई के दायरे में आने वालों में 135 मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) स्तर के बड़े अफसर शामिल हैं.

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उन्होंने बताया कि 7 अफसरों को सीधे नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है, जबकि कई को डिमोट किया गया और कई की वेतन वृद्धि रोक दी गई है. अनियमित भुगतान के मामलों में दागी अफसरों से लगभग ₹3 से ₹4 करोड़ की सरकारी राशि वसूली जा चुकी है. मनमानी और ऊंची दरों पर सामग्री सप्लाई करने वाले 80 से अधिक ठेकेदारों और सप्लायर्स को ब्लैकलिस्ट व दंडित किया गया है.

AI और जेम पोर्टल से पकड़ी गई चोरी

बैठक में संजय दुबे ने एक चौंकाने वाला उदाहरण देकर पूरी धांधली का खुलासा किया था. उन्होंने बताया कि कैसे एक ही राज्य के भीतर एक नगर पालिका ने कचरा उठाने वाला वाहन 2 लाख रुपये में खरीदा, जबकि दूसरी पालिका ने उसी वाहन के साथ चार डस्टबिन जोड़कर उसका बिल सीधे 6 लाख रुपये बना दिया.

विभाग में रोज 1,000 से 1,500 ऑर्डर दिए जाते हैं, जिनका दायरा 5 रुपये की सुई से लेकर 500 करोड़ रुपये के बड़े प्रोजेक्ट्स तक होता है. इतने बड़े डेटा को मैन्युअली जांचना नामुमकिन था, इसलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया गया. AI के जरिए यह ट्रैक किया गया कि कौन सा वेंडर अलग-अलग निकायों को समान सामग्री किस भाव में बेच रहा है और दरों में कितना अंतर है.

वायरल वीडियो की असली कहानी (Bhopal Bhauri training institute Sanjay Dubey video)

सोशल मीडिया पर मचे बवाल पर विराम लगाते हुए एसीएस ने बताया कि यह वीडियो 16 अप्रैल को भोपाल के भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा प्रशिक्षण संस्थान का था. उस सत्र में नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे और MPSEDC के विशेषज्ञ भी मौजूद थे. अफसरों को डेटा दिखाकर साफ समझाया गया था कि वे यह मुगालते में न रहें कि बंद कमरों में किए गए बिल भुगतान किसी की पकड़ में नहीं आएंगे. ई-नगरपालिका सॉफ्टवेयर के जरिए होने वाले एक-एक रुपये के लेन-देन का डिजिटल फुटप्रिंट सरकार के पास सुरक्षित है.

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सुशासन की कसौटी पर तकनीक का पहरा (ACS Sanjay Dubey On Corruption In Madhya Pradesh)

सरकारी महकमों में कमीशनखोरी और फर्जी बिलों के पुराने ढर्रे पर अब डिजिटल पहरेदारी भारी पड़ रही है. जब किसी महकमे का शीर्ष अधिकारी डेटा और एआई को अपना हथियार बनाकर 392 अफसरों के खिलाफ एक साथ कार्रवाई की हिम्मत दिखाता है, तो यह आम जनता के विश्वास को मजबूत करता है. संजय दुबे का यह एक्शन संदेश देता है कि जनता के पैसों से अपनी जेबें भरने वाले चाहे जितने शातिर हों, तकनीक और सुशासन के शिकंजे से बच पाना अब उनके लिए नामुमकिन है.



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