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अजित पवार को ‘दादा’ क्यों कहते थे समर्थक? जानिए इस नाम के पीछे की कहानी

Why Ajit Pawar Support Call him ‘Dada’: अजित पवार को समर्थक ‘दादा’ क्यों कहते थे? जानिए इस नाम के पीछे की कहानी, उनकी राजनीति, बारामती कनेक्शन की पूरी जानकारी

Why Ajit Pawar Support Call him 'Dada'

Why Ajit Pawar Support Call him ‘Dada’: बुधवार (28 जनवरी) को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) की एक प्लेन दुर्घटना में मृत्यु हो गई. बताया जा रहा है कि मुंबई से अपने पैतृक गांव बारामती के लिए सुबह निजी विमान से उड़ान भरी. हालांकि, प्लेन की लैंडिंग के वक्त तकनीकी खराबी के चलते विमान क्रैश हो गया, जिसमें अजित पवार समेत 5 लोगों की मौके पर मौत हो गई.

इस हादसे के बाद पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ पड़ी है. अजित पवार के समर्थक उन्हें प्यार और सम्मान से ‘दादा’ कहकर बुलाते थे. आज उनके समर्थक अपने इसी ‘दादा’ को याद कर भावुक नजर आ रहे हैं. लेकिन सवाल उठता है कि आखिर किसी नेता को ‘दादा’ क्यों कहा जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह.

अजित पवार को ‘दादा’ क्यों बुलाते थे? (Ajit Pawar Support Call him ‘Dada’)

महाराष्ट्र में बड़े भाई को ‘दादा’ का दर्जा दिया जाता है. अजित पवार के समर्थक उन्हें अपना ‘दादा’ (बड़े भाई) कहकर बुलाते थे क्योंकि वे अपनी सख्त कार्यशैली, अनुशासन, प्रशासन पर गहरी पकड़ और काम को तुरंत पूरा करने की क्षमता (डिसीजन मेकर) के लिए जाने जाते थे. उनके समर्थकों के बीच उनका यह “दादा” ब्रांड रुतबा, उनके व्यावहारिक रवैये और बारामती के आधार से जुड़ा था.

NCP दो धड़ों में बंटी (NCP Separation)

साल 2023 महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ लेकर आया, जब अजित पवार ने बगावत का रास्ता चुनते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को दो धड़ों में बांट दिया. इस राजनीतिक टूट के बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई. एक गुट शरद पवार के नेतृत्व में रहा, जिसे बाद में NCP (शरद पवार गुट) या NCP (SP) के नाम से जाना गया, जबकि दूसरा गुट अजित पवार के नेतृत्व में सामने आया, जिसे चुनाव आयोग से NCP का आधिकारिक नाम और चिन्ह मिला.


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NCP (SP) से अलग होने के बाद अजित पवार अपने समर्थक विधायकों को एकजुट कर महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में शामिल हो गए. इसके साथ ही उन्होंने एक बार फिर सत्ता के केंद्र में मजबूत वापसी की और राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद संभाला. अजित पवार का यह कदम न सिर्फ पार्टी के भीतर सबसे बड़ी राजनीतिक टूट माना गया, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदलने वाला फैसला भी साबित हुआ.

-भारत एक्सप्रेस



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