Bharat Express DD Free Dish

विलय की चर्चाओं के बीच अमित जोगी की बड़ी हुंकार, लॉन्च की ‘जोगी कांग्रेस 2.0’; क्या बदल पाएगी सूबे की सियासत?

छत्तीसगढ़ में अमित जोगी ने “जोगी कांग्रेस 2.0” के जरिए जनता कांग्रेस को नए सिरे से सक्रिय करने की शुरुआत की है. युवा नेतृत्व और नई रणनीति के साथ पार्टी अपनी खोई हुई राजनीतिक पहचान वापस पाने की कोशिश में जुटी है.

रिपोर्ट- प्रियंका


छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है. लंबे समय से कांग्रेस में विलय की संभावनाओं पर चर्चा के बीच अब पार्टी ने अलग राह चुन ली है. पार्टी अध्यक्ष अमित जोगी ने “जोगी कांग्रेस 2.0” की शुरुआत का ऐलान करते हुए साफ संकेत दिया है कि उनकी प्राथमिकता अब संगठन को नए सिरे से खड़ा करना और प्रदेश की राजनीति में फिर से मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना है.

अमित जोगी का कहना है कि पार्टी अब नई सोच, युवा नेतृत्व और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के साथ आगे बढ़ेगी. इसके साथ ही उन्होंने राज्य में “बेटा बचाओ आंदोलन” चलाने की भी घोषणा की है. उनका दावा है कि आने वाले समय में जनता से सीधे जुड़कर संगठन को फिर से मजबूत बनाया जाएगा.

अजित जोगी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश

छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय अजित जोगी राज्य की राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते थे. प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आने के बाद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहे. बाद में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) का गठन किया. हालांकि उनकी पार्टी तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप में पूरी तरह स्थापित नहीं हो सकी.

अजित जोगी के निधन के बाद पार्टी की राजनीतिक पकड़ लगातार कमजोर होती गई. अब उनके बेटे अमित जोगी अपनी मां और विधायक डॉ. रेणु जोगी के साथ मिलकर संगठन को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं. उनका मानना है कि पार्टी अभी भी प्रदेश की राजनीति में अपनी जगह बना सकती है, बशर्ते संगठन को नए तरीके से खड़ा किया जाए.

कांग्रेस ने साधा निशाना

जनता कांग्रेस की इस नई शुरुआत पर कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में तीसरे मोर्चे की संभावनाएं हमेशा सीमित रही हैं. कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश की राजनीति मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच ही केंद्रित रहती है और तीसरे दलों को यहां कभी स्थायी जनसमर्थन नहीं मिल पाया.

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने अपना पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 2018 में लड़ा था. उस चुनाव में पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया था और 90 में से 5 सीटों पर जीत हासिल की थी. पार्टी को करीब 7.6 प्रतिशत वोट भी मिले थे, जिसे उस समय एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना गया था.

लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई. पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी और उसका वोट प्रतिशत घटकर 1 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गया. इस नतीजे ने संगठन के सामने अस्तित्व बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी.

क्या फिर बन पाएगी राजनीतिक पहचान?

छत्तीसगढ़ की राजनीति लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमती रही है. बहुजन समाज पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और आम आदमी पार्टी जैसी कई पार्टियां भी राज्य में अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन नहीं बना सकीं. ऐसे में अमित जोगी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पिता की राजनीतिक विरासत को नए दौर के हिसाब से आगे बढ़ाने की है.

यह भी पढ़ें: सीमावर्ती जिलों के SP संग गृह मंत्री अमित शाह की बड़ी बैठक; अवैध घुसपैठ और जाली दस्तावेजों के नेटवर्क पर कसेगा शिकंजा

भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read