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सहकारिता अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत, हरियाणा बन रहा है खुशहाली का नया मॉडल- अमित शाह

पंचकूला में अमित शाह ने कहा कि हरियाणा खेती और सहकारिता को जोड़कर किसानों की समृद्धि का नया मॉडल पेश कर रहा है. उन्होंने 1.27 लाख करोड़ के कृषि बजट और अमूल मॉडल का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे सहकारिता के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है.

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को पंचकूला में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल सहकारी सम्मेलन में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक और आर्थिक संदेश देते हुए कहा कि हरियाणा खेती को सहकारिता (Cooperative) से जोड़कर किसानों की खुशहाली की एक नई कहानी लिख रहा है.

कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (KRIBHCO) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भविष्य सहकारिता पर ही टिका है. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों, सहकारी समितियों और सरकारी नीतियों का तालमेल ही लंबे समय तक खुशहाली ला सकता है. शाह के मुताबिक, यह सिर्फ अल्पकालिक राहत का जरिया नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का रास्ता है.

कई बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत

अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अवसर पर गृह मंत्री ने हरियाणा के लिए कई महत्वपूर्ण सुविधाओं का उद्घाटन किया. इनमें एक मिल्क चिलिंग सेंटर, हैफेड (HAFED) की फ्लोर मिल और सहकारी पोर्टल का शुभारंभ शामिल है. इसके अलावा उन्होंने किसानों को ‘रूपे प्लेटिनम कार्ड’ बांटे और कई मॉडल पैक्स (PACS) का पंजीकरण भी किया. उन्होंने इन कदमों को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि किसानों के सशक्तिकरण का जरिया बताया.

खेती में तकनीक और विज्ञान का समावेश

अमित शाह ने देश की 70 प्रतिशत आबादी की आजीविका का जिक्र करते हुए कहा कि खेती और पशुपालन को अगर सहकारिता के साथ जोड़ दिया जाए, तो किसानों की आय और अवसर कई गुना बढ़ जाएंगे. उन्होंने गुजरात के ‘अमूल’ मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे सहकारी समितियों के जरिए दूध उत्पादकों को सालाना करीब 90,000 करोड़ रुपये मिल रहे हैं. उन्होंने किसानों से मिट्टी की जांच, प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) अपनाने की अपील की.

बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि 2014 के बाद से कृषि बजट 22,000 करोड़ रुपये से बढ़कर आज 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया है. पीएम-किसान सम्मान निधि, फसल बीमा में सुधार और ई-नाम जैसी योजनाओं ने सुनिश्चित किया है कि खेती का मुनाफा सीधे किसान की जेब तक पहुंचे. शाह ने अंत में जोर देकर कहा कि सहकारिता अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है, जिससे किसान सम्मान के साथ आगे बढ़ सकते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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