देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आज हिंदी भाषा और सांस्कृतिक गौरव का एक बड़ा महाकुंभ सजने जा रहा है. केंद्रीय एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) सोमवार को मुंबई में हिंदी दिवस 2026 और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के भव्य उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित यह दो दिवसीय सम्मेलन महाराष्ट्र की समृद्ध भाषाई और साहित्यिक परंपराओं के साथ राजभाषा हिंदी के जीवंत और गहरे रिश्तों को रेखांकित करेगा.
दिग्गजों की मौजूदगी और गरिमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में महाराष्ट्र की राजनीति और साहित्य जगत के कई दिग्गज शामिल हो रहे हैं. उद्घाटन समारोह के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के अलावा कई वरिष्ठ सांसद, देश भर के जाने-माने विद्वान, साहित्यकार, शिक्षाविद और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों व विभागों के वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे.
‘राजभाषा गौरव’ और ‘राजभाषा कीर्ति’ सम्मान
गृह मंत्रालय (MHA) के राजभाषा विभाग द्वारा साल 2021 से लगातार आयोजित किए जा रहे इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण पुरस्कार वितरण समारोह है. उद्घाटन सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह वर्ष 2025-26 के लिए प्रतिष्ठित ‘राजभाषा गौरव’ और ‘राजभाषा कीर्ति’ पुरस्कार प्रदान करेंगे. राजभाषा हिंदी के प्रसार और सुदृढ़ीकरण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विभिन्न संस्थानों, बैंकों, उपक्रमों और देश भर के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को इन सम्मानों से नवाजा जाएगा.
विशेष प्रकाशनों और किताबों का होगा विमोचन
सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक पुस्तकों व पत्रिकाओं का विमोचन किया जाएगा:
राजभाषा भारती: राजभाषा विभाग की इस प्रतिष्ठित पत्रिका का विशेष यादगार अंक, जो पूरी तरह राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ पर केंद्रित है.
साहित्यक कृतियां: ‘भारतीय ज्ञान तंत्र: स्रोत और स्वरूप’; ‘शिव अनादि हैं, अनंत हैं’; और देश की विभिन्न जेलों के कैदियों की रचनात्मकता का अनूठा संग्रह ‘अंधेरों से उजालों तक’ जैसी पुस्तकें लॉन्च की जाएंगी.
वंदे मातरम के वंशज की विशेष उपस्थिति
इस वर्ष के सम्मेलन का सबसे बड़ा और भावनात्मक आकर्षण राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ पर केंद्रित विशेष सत्र होगा. इस सत्र में जॉयदीप चट्टोपाध्याय की विशेष उपस्थिति रहेगी, जो ‘वंदे मातरम’ के रचयिता अमर साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की पांचवीं पीढ़ी के वंशज हैं. इसके अलावा, ‘टाउन ऑफिशियल लैंग्वेज इम्प्लीमेंटेशन कमेटियों’ (TOLIC) की भूमिका को लेकर भी गहन मंथन किया जाएगा. कार्यक्रम स्थल पर एक भव्य प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जहां विभिन्न मंत्रालयों, बैंकों और संगठनों द्वारा हिंदी के प्रचार-प्रसार से जुड़े स्टॉल सजाए गए हैं.
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