कोलकाता में मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ी हलचल पैदा कर दी. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मतुआ समुदाय के उन लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है, जिन्होंने CAA (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया है. शाह ने भरोसा दिलाया कि उनके वोट देने के अधिकार को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा. दरअसल, बंगाल में वोटर लिस्ट के सुधार (SIR) के दौरान मतुआ समुदाय के वोटिंग राइट्स को लेकर काफी चर्चा हो रही थी.
TMC के प्रचार का देंगे मुंहतोड़ जवाब
अमित शाह ने बंगाल बीजेपी के नेताओं के साथ एक अहम बैठक की. उन्होंने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) जो डर फैला रही है, उसका डटकर मुकाबला करें. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी मतुआ मतदाताओं के बीच भ्रम फैला रही है. शाह ने बीजेपी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे गलियों और मोहल्लों में जाकर लोगों को सच बताएं और उनके मन से डर निकालें.
क्यों अहम है मतुआ समुदाय?
मतुआ समुदाय के लोग मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में रहते हैं. ये लोग सालों पहले बांग्लादेश से शरणार्थी के तौर पर भारत आए थे. पिछले कुछ समय से सीएम ममता बनर्जी लगातार यह आरोप लगा रही हैं कि इन लोगों का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा. अब अमित शाह ने खुद मोर्चा संभालते हुए कहा है कि वह इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखेंगे ताकि किसी भी असली नागरिक का नाम न कटे.
मिशन 2026 की तैयारी शुरू
बैठक में अमित शाह ने सिर्फ मतुआ मुद्दे पर ही बात नहीं की, बल्कि साल 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों का बिगुल भी फूंक दिया. उन्होंने बीजेपी नेताओं को निर्देश दिया कि वे अभी से आक्रामक कैंपेन शुरू कर दें. साथ ही उन्होंने उन अफवाहों को भी खारिज किया जिसमें बीजेपी और TMC के बीच किसी ‘सीक्रेट समझौते’ की बात कही जा रही थी. उन्होंने साफ किया कि बीजेपी पूरी मजबूती के साथ बंगाल में चुनाव लड़ेगी.
ये भी पढ़ें: ‘माना अंधेरा घना है, लेकिन यारो दीया जलाना कहां मना है’, पीएम मोदी के यादगार बयान
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




