छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जंग की तैयारी शुरू हो चुकी है. आगामी 19 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वे एक हाई-लेवल मीटिंग करेंगे, जिसमें चार राज्यों- छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा के मुख्यमंत्री शामिल होंगे. माना जा रहा है कि यह बैठक नक्सलवाद के ताबूत में आखिरी कील ठोकने के समान होगी.
नक्सलवाद पर ‘फाइनल प्रहार’ की रणनीति
केंद्र सरकार ने पहले ही घोषणा कर दी है कि देश से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा. इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए अमित शाह खुद कमान संभाल रहे हैं. इस बैठक में नक्सल प्रभावित राज्यों के बीच आपसी तालमेल (Coordination) बढ़ाने पर चर्चा होगी. अक्सर देखा जाता है कि एक राज्य में ऑपरेशन चलने पर नक्सली दूसरे राज्य की सीमा में भाग जाते हैं. अब चारों राज्यों की पुलिस और सुरक्षा बल मिलकर ‘ज्वाइंट ऑपरेशन’ चलाएंगे.
विकास और सुरक्षा पर रहेगा जोर
बैठक में केवल सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों की भी समीक्षा की जाएगी. सड़कों का जाल बिछाना, मोबाइल टावर लगाना और केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं को अंदरूनी गांवों तक पहुंचाना शाह के एजेंडे में टॉप पर है. सुरक्षा बलों के लिए नए बेस कैंप (FOBs) बनाने और खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र को और मजबूत किया जाएगा.
सुरक्षा बलों का बढ़ता मनोबल
पिछले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने कई बड़े ऑपरेशनों में नक्सलियों को ढेर किया है. अमित शाह की इस यात्रा से जवानों का मनोबल और बढ़ेगा. गृह मंत्रालय का स्पष्ट संदेश है कि या तो नक्सली मुख्यधारा में लौट आएं और सरेंडर कर दें, वरना उन्हें कड़े अंजाम भुगतने होंगे.
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