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लाहौर सेंट्रल जेल से लेकर कोलकाता तक..; पुण्यतिथि अमित शाह ने अमर क्रांतिकारी जतींद्रनाथ दास को कैसे याद किया?

अमर क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी जतींद्रनाथ दास की पुण्यतिथि पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके महान बलिदान को याद किया.

Union Home Minister Amit Shah paying heartfelt tribute to freedom fighter and revolutionary Jatindranath Das on his death anniversary, commemorating his historic 63-day hunger strike in Lahore jail

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जिनका त्याग और बलिदान पत्थर की लकीर बन चुका है. अमर क्रांतिकारी जतींद्रनाथ दास जिन्हें प्यार से ‘जतिन दास’ भी कहा जाता है की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है. केंद्रीय एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर हिंदी और बांग्ला दोनों भाषाओं में संदेश साझा कर जतींद्रनाथ दास के अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति को नमन किया है.

‘जेल की यातनाएं भी नहीं डिगा पाईं उनका संकल्प’

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में लिखा कि स्वतंत्रता संग्राम के अमर क्रांतिकारी जतींद्रनाथ दास जी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन. अल्पायु में ही अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग चुनने वाले जतींद्रनाथ जी को जेल की यातनाएं भी अपने संकल्प से डिगा नहीं सकीं. जेल में स्वाधीनता सेनानियों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार के विरोध में उनकी भूख हड़ताल राष्ट्रभक्ति और अदम्य साहस की अमर मिसाल है.

लाहौर सेंट्रल जेल का वह ऐतिहासिक अनशन

27 अक्टूबर 1904 को कोलकाता में जन्मे जतींद्रनाथ दास ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HSRA) के एक प्रमुख सदस्य थे. युवावस्था में ही वे असहयोग आंदोलन से लेकर क्रांतिकारी गतिविधियों में कूद पड़े थे.

63 दिनों की लंबी भूख हड़ताल

लाहौर सेंट्रल जेल में भारतीय राजनीतिक कैदियों के साथ हो रहे भेदभाव और अमानवीय व्यवहार के खिलाफ जतिन दास ने 13 जुलाई 1929 को भूख हड़ताल शुरू की थी. भगत सिंह सहित अन्य क्रांतिकारियों के साथ यह अनशन लगातार 63 दिनों तक चला. अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें जबरन खाना खिलाने की कई कुत्सित कोशिशें कीं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ा. आखिरकार, 13 सितंबर 1929 को मात्र 24 वर्ष की अल्पायु में जतींद्रनाथ दास ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी.

शहादत के बाद उमड़ा था जनसैलाब

उनकी शहादत ने पूरे ब्रिटिश भारत को झकझोर कर रख दिया था. लाहौर से लेकर कोलकाता तक उनके पार्थिव शरीर के साथ हजारों-लाखों लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे. उनके अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया था कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा. यह घटना स्वतंत्रता संग्राम में राजनीतिक कैदियों के अधिकारों की लड़ाई का सबसे बड़ा प्रतीक बन गई.

आज जतींद्रनाथ दास की पुण्यतिथि पर देश के तमाम हिस्सों में उन्हें याद किया जा रहा है. गृह मंत्री अमित शाह का यह संदेश नई पीढ़ी को उनके अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और उच्च आदर्शों से परिचित कराने का एक बड़ा माध्यम है, जो हमेशा देशवासियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा.



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