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कानपुर से अमृतसर तक… कैसे छाए अमित सिंह राणा? जिनकी पहल ने खींचा पीएम मोदी का भी ध्यान

कौन हैं अमित सिंह राणा जिसकी पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में उनके प्रयासों की सराहना की और इसे देश की सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया.

Who is Amit Singh Rana PM Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात (Mann Ki Baat) में अमृतसर में रहने वाले अमित सिंह राणा के काम की जमकर तारीफ की. जैसे ही कार्यक्रम में उनका नाम लिया गया, अमृतसर के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई.

कौन हैं अमित सिंह राणा? (Who is Amit Singh Rana)

अमित सिंह राणा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं. साल 2013 से वे अमृतसर में रहकर काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा उनके काम की सराहना होना उनके लिए गर्व की बात है और उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद भी किया.

पांडुलिपियों को बचाने की अनोखी पहल

अमित सिंह राणा प्राचीन भारतीय पांडुलिपियों के संरक्षण और शोध का काम कर रहे हैं. उनका उद्देश्य है कि भारत की पुरानी ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जाए. उन्होंने बताया कि देश के कई घरों, मंदिरों, मठों, स्कूलों और पुस्तकालयों में ऐसी पांडुलिपियां मौजूद हैं, जो हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा हैं.

लोगों से अपील: पांडुलिपियों की जानकारी साझा करें

अमित का कहना है कि लोग अक्सर इन पांडुलिपियों को निजी संपत्ति समझकर अपने पास रखते हैं, जबकि यह पूरे देश की विरासत है. इसलिए वे लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि अगर उनके पास ऐसी कोई पांडुलिपि है, तो उसकी जानकारी सरकार तक जरूर पहुंचाएं ताकि उनका सही संरक्षण हो सके.

कैसे शुरू हुआ यह काम

अमित ने बताया कि उन्होंने साल 2006 में राष्ट्रीय अभिलेखागार से एक कोर्स किया था. इसके बाद उन्होंने अलग-अलग राज्यों में जाकर पांडुलिपियों के संरक्षण पर काम शुरू किया.


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‘ज्ञान भारतम ऐप’ से जुड़ने की अपील

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि अगर किसी के पास पांडुलिपि है या उसकी जानकारी है, तो उसकी फोटो ज्ञान भारतम ऐप पर जरूर अपलोड करें. हर जानकारी को जांच के बाद ही दर्ज किया जाता है. प्रधानमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश के चाओ नंतिसिन्ध लोकांग और राजस्थान के अभय जैन ग्रंथालय जैसे उदाहरण भी दिए. उन्होंने बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस अभियान में जुड़ रहे हैं और अपनी पुरानी पांडुलिपियां साझा कर रहे हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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