Amphan Relief Scam- Abhishek Banerjee
Amphan Relief Scam: दक्षिण 24 परगना/संजय मांझी: तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. ईडी और सीआईडी के बाद अब उन पर राहत कोष के पैसे डकारने के आरोप लग रहे हैं. बाते दें कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फलता ब्लॉक में अम्फान चक्रवात राहत वितरण को लेकर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. शिकायतकर्ताओं ने सरकारी दस्तावेजों और लाभार्थी डेटाबेस के विश्लेषण के आधार पर दावा किया है कि मछुआरा राहत और आवास सहायता योजनाओं में कुल ₹47 करोड़ से अधिक की राशि के वितरण में गंभीर गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं.
मछुआरा राहत में ₹2.68 करोड़ अनियमितता
शिकायत के अनुसार वर्ष 2020 में अम्फान चक्रवात के बाद फलता ब्लॉक के मछुआरों के लिए ₹2.68 करोड़ की सरकारी राहत राशि आवंटित की गई थी. सरकारी रिकॉर्ड में 10,000 मछली पकड़ने के जाल (फिशिंग नेट) क्षतिग्रस्त दिखाकर राहत राशि स्वीकृत की गई, जबकि उसी दस्तावेज में केवल 80 नावों के क्षतिग्रस्त होने का उल्लेख है.
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जाल और नावों के नुकसान के आंकड़ों में यह बड़ा अंतर राहत वितरण प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है. आरोप लगाया गया है कि फर्जी लाभार्थियों, जाली सत्यापन रिपोर्टों, गलत क्षति आकलन तथा सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की जांच की जानी चाहिए. इस मामले में तत्कालीन डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी, तत्कालीन फलता विधायक शंकर कुमार नस्कर, जहांगीर खान, तत्कालीन बीडीओ तथा संबंधित पंचायत और सत्यापन अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है.
44.70 करोड़ रुपये के वितरण पर सवाल
अम्फान चक्रवात से प्रभावित लोगों की मदद के लिए फलता ब्लॉक में 39,041 लाभार्थियों को करीब ₹44.70 करोड़ की सरकारी सहायता दी गई थी. हालांकि, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि लाभार्थियों की सूची की जांच में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं. इनमें एक ही व्यक्ति या परिवार के नाम की बार-बार एंट्री, एक ही मोबाइल नंबर का कई रिकॉर्ड में इस्तेमाल और अन्य संदिग्ध जानकारियां शामिल हैं.
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ मामलों में नुकसान का सही तरीके से सत्यापन किए बिना ही राहत राशि मंजूर और वितरित की गई है. इसके अलावा राहत राशि देने के बदले कथित तौर पर कट-मनी वसूले जाने के आरोप भी लगाए गए हैं. शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि सरकारी डेटाबेस के “Recommended By” कॉलम में कई मामलों में अभिषेक बनर्जी का नाम दर्ज है. इसी वजह से शिकायतकर्ताओं ने उनकी भूमिका और इन सिफारिशों के आधार की जांच कराने की मांग की है.
FIR और फोरेंसिक ऑडिट की मांग
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि सभी लाभार्थी सूचियों, बैंक खातों, सत्यापन रिपोर्टों और संबंधित सरकारी दस्तावेजों को जब्त कर एफआईआर दर्ज की जाए तथा पूरे मामले की आपराधिक जांच शुरू की जाए. साथ ही लाभार्थी डेटाबेस का फोरेंसिक ऑडिट, डिजिटल सर्वर लॉग की जांच, बैंक ट्रांजैक्शन की पड़ताल तथा कथित रूप से अवैध लाभ प्राप्त करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.
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शिकायतकर्ताओं का बयान
शिकायतकर्ताओं ने कहा, “सरकारी दस्तावेजों और लाभार्थी डेटाबेस के विश्लेषण से यह संकेत मिले हैं कि फलता ब्लॉक में अम्फान राहत के ₹47 करोड़ से अधिक के वितरण में डुप्लिकेट लाभार्थियों, फर्जी रिकॉर्ड और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग जैसी गंभीर अनियमितताएं हो सकती हैं. इसलिए अभिषेक बनर्जी, शंकर कुमार नस्कर, जहांगीर खान, संबंधित बीडीओ, एडीएम (डेवलपमेंट) तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए.”
-भारत एक्सप्रेस
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