Anant Singh bail Dularchand Yadav murder case: बिहार के बाहुबली नेता और मोकामा विधायक अनंत सिंह के लिए आज का दिन बड़ी राहत लेकर आया है. पटना हाईकोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है, जिसके बाद अब बेऊर जेल प्रशासन को रिहाई का आदेश भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
बता दें कि दुलारचंद यादव की हत्या पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बाढ़ इलाके में हुई थी, जिसमें अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया था. पिछले कई महीनों से सलाखों के पीछे बंद ‘छोटे सरकार’ के लिए यह कानूनी जीत उनके राजनीतिक भविष्य और समर्थकों के लिए संजीवनी बनकर आई है. अदालत ने माना कि जांच की वर्तमान स्थिति और साक्ष्यों के आधार पर उन्हें और अधिक समय तक कस्टडी में रखना आवश्यक नहीं है.
शनिवार तक घर लौटेंगे अनंत सिंह
कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब बेऊर जेल से उनकी रिहाई की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि बेल बॉन्ड भरने और अन्य कागजी औपचारिकताएं समय पर पूरी हो गईं, तो शुक्रवार की शाम या शनिवार सुबह तक वे जेल की दहलीज से बाहर होंगे.
वहीं रिहाई की खबर मिलते ही पटना स्थित उनके आवास और बेऊर जेल के बाहर समर्थकों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है. समर्थकों का कहना है कि वे अपने नेता का स्वागत एक ‘विजेता’ की तरह करेंगे और इसके लिए राजधानी पटना से लेकर मोकामा तक भव्य रोड शो और आतिशबाजी की योजना बनाई जा रही है.
मोकामा और पटना में जश्न का माहौल
अनंत सिंह का सियासी रसूख ऐसा है कि जेल के भीतर रहते हुए भी वे चर्चाओं में बने रहे. जैसे ही रिहाई की पुष्टि हुई, मोकामा के पैतृक गांव और बाढ़-ताल क्षेत्र में समर्थकों ने मिठाई बांटनी शुरू कर दी. समर्थकों के बीच उन्हें ‘टाइगर’ के नाम से पुकारा जाता है और उनके घर पर जुटी भीड़ का कहना है कि ‘छोटे सरकार’ की वापसी से क्षेत्र के सियासी समीकरण एक बार फिर बदल जाएंगे. समर्थकों में भारी उत्साह है और वे अपने नेता की एक झलक पाने के लिए बेताब नजर आ रहे हैं. क्षेत्र में जगह-जगह उनके स्वागत के पोस्टर लगने भी शुरू हो गए हैं.
सियासी गलियारों में हलचल
अनंत सिंह की रिहाई का समय बिहार की राजनीति के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है. विधानसभा चुनाव के बाद से ही वे जेल में थे, हालांकि उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में पुलिस कस्टडी में आकर वोट भी डाला था. जेडीयू विधायक के रूप में उनकी सक्रियता अब सदन के भीतर और बाहर बढ़ना तय है.
विपक्षी खेमे में भी इस रिहाई को लेकर सुगबुगाहट तेज है, क्योंकि मोकामा और आसपास के इलाकों में अनंत सिंह की पकड़ किसी से छिपी नहीं है. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जेल से बाहर आने के बाद अनंत सिंह का अगला सियासी कदम क्या होगा और वे अपनी नई पारी की शुरुआत किस अंदाज में करेंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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