मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर के मुख्य वित्तीय अधिकारी अशोक पाल को राऊज एवेन्यु कोर्ट के डियूटी मजिस्ट्रेट के यहां पेश किया गया, जहां कोर्ट ने दो दिन के लिए ईडी रिमांड पर भेज दिया है. अशोक पाल को 68 करोड़ रुपए की कथित बैंक गारंटी से संबंधित मामले में लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने गिरफ्तार किया है.
अशोक पाल की यह गिरफ्तारी 2024 में हुई एक एफआईआर के आधार पर की गई है, जिसमें सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को फर्जी गारंटी दी गई थी. इसके अलावे अशोक पाल पर करोड़ों रुपए के फर्जी ट्रांसपोर्ट बिलों के जरिए धन निकालने का भी आरोप है.
बताया जा रहा है कि उन्होंने व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए भुगतान की फाइलें मंजूर की, ताकि कंपनी की आधिकारिक प्रणाली को दरकिनार किया जा सके. इतना ही नहीं, जांच में यह भी पता चला है कि उन्होंने जिन बैंकों के नाम से गारंटी दी, असल में वे उस देश में मौजूद है ही है.
RHFL और RCFL की ओर से 12,524 करोड़ रुपये के लोन दिए
हाल ही में ईडी ने अनिल अंबानी को पूछताछ के लिए बुलाया था. ईडी के मुताबिक RHFL और RCFL की ओर से 12,524 करोड़ रुपये के लोन दिए गए. इनमें से ज्यादातर लोन रिलायंस अनिल अंबानी की कंपनी को दिया गया. इनमें से 6,931 करोड़ रुपए का लोन नॉन परफॉर्मिंग असेट्स घोषित किया गया है.
दरअसल रिलायंस पावर लिमिटेड एक सूचीबद्ध कंपनी हैं और इसमें 75 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी सार्वजनिक निवेशकों की है. कंपनी के बोर्ड प्रस्ताव के तहत अशोक कुमार पाल को टेंडर से जुड़े सभी दस्तवेज़ों को अंतिम रूप देने, स्वीकृत करने और हस्ताक्षर करने का अधिकार दिया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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