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वकील से वित्त मंत्री तक… ‘संकटमोचक’ अरुण जेटली की आज छठी पुण्यतिथि, अमृतसर से दिल्ली तक ऐसा था सफर

Arun Jaitley Death Anniversary: अरुण जेटली की छठी पुण्यतिथि पर उनके अमृतसर से दिल्ली तक के सफर को याद किया जा रहा है. वकील से वित्त मंत्री बनने तक उन्होंने भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दिया.

6th death anniversary of Arun Jaitley

AI जनरेटेड फोटो

Arun Jaitley Death Anniversary: आज अरुण जेटली की छठी पुण्यतिथि है. भारतीय राजनीति और कानून जगत में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा. वकील से लेकर देश के वित्त मंत्री बनने तक का उनका सफर बेहद खास रहा.

अमृतसर की गलियों से वकालत तक का सफर

1952 में अमृतसर में जन्मे जेटली ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की. छात्र राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने एबीवीपी से जुड़कर अपनी पहचान बनाई. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत शुरू की और जल्दी ही देश के नामी वकीलों में गिने जाने लगे.

आपातकाल के आंदोलन से राजनीति में कदम

आपातकाल के दौरान जेटली ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाई. इसी दौर में उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बनी. बाद में वे बीजेपी से जुड़े और धीरे-धीरे पार्टी के अहम चेहरे बन गए.

मंत्री के रूप में अहम योगदान

स्वर्गीय अरुण जेटली का राजनीतिक करियर बेहद प्रभावशाली रहा और उन्होंने विभिन्न सरकारों में इन सभी महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली थी-

1999 में सूचना प्रसारण मंत्री: वह 13 अक्टूबर 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने थे.

2000 और 2003 में कानून मंत्री: उन्होंने पहली बार जुलाई 2000 में विधि, न्याय और कंपनी मामलों का अतिरिक्त प्रभार लिया और नवंबर 2000 में कैबिनेट मंत्री बने. इसके बाद, जनवरी 2003 में वह दोबारा कानून मंत्री (विधि एवं न्याय मंत्री) बनाए गए.

2000 और 2003 में कानून मंत्री: उन्होंने पहली बार जुलाई 2000 में विधि, न्याय और कंपनी मामलों का अतिरिक्त प्रभार लिया और नवंबर 2000 में कैबिनेट मंत्री बने. इसके बाद, जनवरी 2003 में वह दोबारा कानून मंत्री (विधि एवं न्याय मंत्री) बनाए गए.

2014 से 2019 तक वित्त और कॉरपोरेट मामलों के मंत्री: मोदी सरकार के पहले कार्यकाल (26 मई 2014 से मई 2019 तक) में वह देश के पूर्णकालिक वित्त और कॉरपोरेट मामलों के मंत्री रहे.

2014 व 2017 में रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार

  • मई 2014 से नवंबर 2014 तक (मनोहर पर्रिकर के रक्षा मंत्री बनने से पहले) उनके पास रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार था.
  • मार्च 2017 से सितंबर 2017 तक (मनोहर पर्रिकर के गोवा के मुख्यमंत्री बनने के बाद और निर्मला सीतारमण के कार्यभार संभालने से पहले) उन्होंने कुछ समय के लिए फिर से रक्षा मंत्रालय संभाला था.

GST सबसे बड़ी उपलब्धि

वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने कई बड़े आर्थिक फैसले लिए. जीएसटी लागू करना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. इसके अलावा उन्होंने नोटबंदी और बैंकिंग सुधारों में भी अहम भूमिका निभाई.

तेज सोच, बेहतरीन तर्कशक्ति और संवाद क्षमता

अरुण जेटली को उनकी तेज सोच, बेहतरीन तर्कशक्ति और संवाद क्षमता के लिए जाना जाता था. वे विपक्ष और सत्ता दोनों में समान रूप से सम्मानित नेता रहे.

क्यों कहा जाता था ‘संकटमोचन’?

अरुण जेटली को ‘संकटमोचक’ कहा जाता था. वे बीजेपी और सरकार के लिए हर मुश्किल समय में समाधान निकालने वाले नेता थे. चाहे राजनीतिक संकट हो, कानूनी पेचीदगियां हों या आर्थिक चुनौतियां जेटली अपनी समझ, तर्कशक्ति और संवाद क्षमता से हालात संभाल लेते थे.

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2019 में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया. उनकी नीतियां और योगदान आज भी भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में जीवित हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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