असम के जोरहाट से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई सन्न है. एक पिता, जो अपने मासूम बेटे की कामयाबी का गवाह बनने स्कूल पहुंचा था, वहां से जिंदा वापस नहीं लौट पाया. रिपोर्ट कार्ड हाथ में आते ही खुशियों की जगह मातम पसर गया.
खुशी का पल मातम में बदला
जोरहाट के सैमफोर्ड स्कूल में मंगलवार का दिन बाकी दिनों की तरह ही हलचल भरा था. माता-पिता अपने बच्चों का रिजल्ट लेने स्कूल पहुंच रहे थे. इन्हीं के बीच 35 वर्षीय दीपांकर बोरदोलोई भी थे. दीपांकर अपने बेटे का रिजल्ट लेने आए थे, जो अभी महज UKG में पढ़ता है.
दीपांकर ने जैसे ही बेटे का रिजल्ट लिया और स्कूल से बाहर निकलने लगे, अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वो अचानक लड़खड़ाए और जमीन पर गिर पड़े. स्कूल कैंपस में मौजूद लोग तुरंत उनकी मदद के लिए दौड़े. आनन-फानन में उन्हें जोरहाट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया.
कौन थे दीपांकर बोरदोलोई?
मृतक दीपांकर बोरदोलोई कछ गरल इलाके के सोनारी गांव के रहने वाले थे. पेशे से वो एक काबिल इंजीनियर थे और तेओक डिवीजन के सिंचाई विभाग में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर तैनात थे. उनकी पहचान एक हंसमुख और जिम्मेदार इंसान के तौर पर थी. इतनी कम उम्र में उनके चले जाने से विभाग के सहकर्मी और स्थानीय लोग गहरे सदमे में हैं.
सदमे में अभिभावक
इस दुखद घटना के बाद स्कूल के माहौल में उदासी छा गई है. स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों के लिए यह यकीन करना मुश्किल हो रहा है कि चंद मिनट पहले जो शख्स अपने बच्चे के भविष्य को लेकर बात कर रहा था, वो अब इस दुनिया में नहीं है. स्कूल कैंपस में मौजूद अन्य अभिभावक भी इस घटना से डरे और सहमे हुए हैं.
फिलहाल मौत की असल वजह साफ नहीं हो पाई है. पुलिस ने भी अभी इस मामले में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है. हालांकि, कयास लगाए जा रहे हैं कि यह अचानक आया हार्ट अटैक हो सकता है, लेकिन सच पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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