Ayodhya Ram Mandir Flag Hoisting: अयोध्या में राम मंदिर ध्वजारोहण समारोह के ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने एक भावुक और प्रेरक संबोधन दिया. उन्होंने इस दिन को उन सभी संतों श्रद्धालुओं और कर्मयोगियों के लिए सार्थकता का क्षण बताया जिन्होंने सदियों तक राम मंदिर निर्माण के संकल्प के लिए संघर्ष किया और अपने प्राण अर्पित किए. भागवत ने कहा कि जिन महान आत्माओं ने इस स्वप्न को साकार देखने की इच्छा रखी थी आज उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी.
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने विशेष रूप से अशोक सिंघल संत परमहंस चंद्र दास और आदरणीय डालमिया जी जैसी विभूतियों का स्मरण करते हुए कहा कि आज उन्हें वास्तविक शांति मिली होगी. मंदिर की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई है और राम राज्य का वह ध्वज जो कभी अयोध्या में फहराया करता था और पूरी दुनिया को अपने आलोक से समृद्धि देता था आज हमारी आंखों के सामने पुनः आकाश में ऊंचा उठा है.

11 मिनट दिया संबोधन
अपने करीब ग्यारह मिनट के संबोधन में सरसंघचालक ने राम राज्य के ध्वज पर बने रघुकुल के प्रतीक कोविदार वृक्ष का भी उल्लेख किया. उन्होंने समझाया कि यह वृक्ष त्याग छाया और लोककल्याण का प्रतीक है जो स्वयं धूप में खड़ा रहकर दूसरों को फल और सुख देता है. यही रघुकुल की सत्ता और जीवन दर्शन का आधार रहा है.

‘संकल्प की सिद्धि सत्व’
सूर्य भगवान का उदाहरण देते हुए भागवत ने कहा कि संकल्प की सिद्धि सत्व से होती है. उन्होंने कहा कि रथ चलाने के लिए सात घोड़े हैं और लगाम है पर यदि रस्सा और सारथी न हों तो रथ नहीं चल सकता फिर भी सूर्य देव रोज पूर्व से पश्चिम जाते हैं क्योंकि यह सत्व की शक्ति है. हिंदू समाज ने साढ़े पांच सौ वर्षों तक अपने इसी सत्व को सिद्ध किया है जिसके परिणामस्वरूप आज रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हैं.
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राम मंदिर आज साकार- मोहन भागवत
भागवत ने जोर देकर कहा कि जितना सपना उन संतों और कार्यकर्ताओं ने देखा था उससे भी अधिक भव्य रूप में राम मंदिर आज साकार हुआ है. यह केवल एक निर्माण नहीं बल्कि हिंदू समाज के धैर्य सामर्थ्य और श्रद्धा की विजय है. उन्होंने आह्वान किया कि छाया बांटने वाले भारत को खड़ा करने का काम शुरू हो गया है और हमें सभी विपरीत परिस्थितियों में भी काम करना है.

यह संकल्प की पुनरावृत्ति का दिवस है. विश्व की अपेक्षा है कि सबके लिए खुशी और शांति बांटने वाला भारतवर्ष खड़ा हो. हमारा कर्तव्य है कि रामलला का नाम लेकर इस कार्य की गति बढ़ाएं. ध्वजारोहण समारोह के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनकर जय श्री राम के उद्घोष से वातावरण को गुंजायमान कर दिया.
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