बलिया कांग्रेस कार्यालय विवाद
रिपोर्ट- नरेन्द्र मिश्र/बलिया
UP News: उत्तर प्रदेश के बलिया में कांग्रेस कार्यालय पर भाजपा महिला कार्यकर्ताओं द्वारा झंडा फहराने का मामला अब राजनीतिक तकरार का बड़ा मुद्दा बन गया है. मंगलवार को हुई इस घटना के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रेसवार्ता कर भाजपा और पुलिस प्रशासन पर जमकर निशाना साधा. पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए कांग्रेस भवन और उसके परिसर को गंगाजल से धोकर शुद्धिकरण भी किया.
पूर्व मंत्री पर साधा निशाना
मीडिया से बातचीत के दौरान एक कांग्रेस नेता ने भाजपा की एक महिला पदाधिकारी के साथ-साथ जिले के एक पूर्व मंत्री को भी निशाने पर लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री खुद सामने आने के बजाय महिलाओं को आगे कर राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं. कांग्रेस नेता ने उन्हें “शिखंडी” की संज्ञा देते हुए कहा कि पर्दे के पीछे रहकर राजनीति करने की कोशिश की जा रही है.
कोतवाल की भूमिका पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने बलिया शहर कोतवाल की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए. उनका कहना था कि पूरी घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई, लेकिन प्रशासन मूक दर्शक बना रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि कोतवाल स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय किसी होमगार्ड की तरह व्यवहार कर रहे थे.
कांग्रेस नेता ने यह भी पूछा कि आखिर किस नियम और किसके निर्देश पर एक अधिकारी को दोबारा उसी थाने में तैनाती दी गई. उन्होंने कहा कि यह पहली बार सुनने को मिल रहा है कि पुलिस विभाग में किसी को दोबारा उसी जगह पोस्टिंग मिल रही है.
लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती पर सवाल
कांग्रेस की ओर से यह मुद्दा भी उठाया गया कि चुनाव के समय आमतौर पर अधिकारियों का तबादला कर दिया जाता है, लेकिन बलिया के कोतवाल लंबे समय से उसी पद पर बने हुए हैं. नेता ने सवाल किया कि जब अन्य अधिकारियों को हटाया जाता है तो फिर इस अधिकारी को विशेष छूट क्यों दी जा रही है. उन्होंने मांग की कि कोतवाल को तत्काल पद से हटाकर जिले से बाहर भेजा जाए.
राजनीतिक सफर को लेकर भी किया हमला
पूर्व मंत्री के राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने कई दलों का सफर तय किया है. उनके अनुसार, वह पहले लोकदल में रहे, फिर समाजवादी पार्टी में पहुंचे, उसके बाद बहुजन समाज पार्टी में गए, फिर दोबारा सपा और अंत में भाजपा में शामिल हो गए. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मुलायम सिंह यादव ने उन्हें राजनीतिक पहचान दिलाई, बाद में उन्हीं का अपमान किया गया.
ऐतिहासिक धरोहर का अपमान बताई घटना
कांग्रेस नेता ने कहा कि बलिया का कांग्रेस कार्यालय केवल एक पार्टी कार्यालय नहीं बल्कि आजादी की लड़ाई से जुड़ा ऐतिहासिक स्थान है. उन्होंने याद दिलाया कि 1942 में जब देश अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ संघर्ष कर रहा था, तब बलिया ने स्वतन्त्रता का इतिहास रचा था. चित्तू पांडेय और मंगल पांडेय जैसे स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े इस भवन पर राजनीतिक प्रदर्शन करना और झंडा लगाना उनके सम्मान के खिलाफ है.
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72 घंटे का अल्टीमेटम
कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले 72 घंटे के भीतर इस मामले में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और कोतवाल पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी बड़ा आंदोलन छेड़ सकती है. नेताओं ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर चुप बैठने वाली नहीं है और आगे की रणनीति जल्द तय की जाएगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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