Ajit Pawar plane crash: पिछले साल 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए विमान हादसे ने पूरे देश को हिला दिया था. उस दुर्घटना में 241 यात्रियों की जान चली गई थी. चमत्कारिक रूप से सिर्फ एक यात्री कुमार रमेश बच पाए थे. वे विमान की 11ए सीट पर बैठे थे जिसे सबसे सुरक्षित सीट माना जाता है. विमान उड़ान भरते ही कुछ दूरी पर धमाके के साथ गिरा और लाखों लीटर ईंधन होने के वजह से आग का विशाल गोला बन गया.
बारामती में VIP फ्लाइट हादसा
अब महाराष्ट्र के बारामती जिले में एक और बड़ा हादसा हो गया है. बुधवार को अजित पवार जिस विमान में सवार थे वह रनवे नंबर 11 पर उतरने से पहले ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया. यह रनवे ऊंचाई पर बना हुआ था और इसे टेबलटॉप एयरस्ट्रिप कहा जाता है. ऐसे रनवे पर लैंडिंग हमेशा जोखिम भरी होती है क्योंकि आस पास का इलाका ऊबड़-खाबड़ है.
ATC ने क्या निर्देश दिया था?
मुंबई से सुबह 8:10 बजे विमान ने उड़ान भरी थी. पहले पुणे ATC और फिर बारामती ATC से संपर्क हुआ. जब पायलट को रनवे दिखाई नहीं दिया तो ATC ने उन्हें गोअराउंड करने का निर्देश दिया. यानी विमान को एक चक्कर लगाकर दोबारा लैंडिंग की कोशिश करनी थी. 8:43 बजे पायलट को दोबारा लैंडिंग की अनुमति मिली लकिन 8:45 बजे रनवे पर उतरने से ठीक पहले विमान खाई में गिर गया.
आखिरी तीन मिनट का रहस्य
लैंडिंग से पहले के अंतिम तीन मिनट बेहद साबित हुए. विमान रनवे से लगभग 50 मीटर दूर और 100 फीट नीचे गिरा. CCTV फुटेज में साफ दिखा कि विमान गिरते ही जोरदार झमाका हुआ और आग की ऊंची लपटें उठीं. धुएं का गुबारा भी कैमेरे में कैद हुआ.
हादसे की भयावह
VSR वेंचर्स लिमिटेड का लियर जेट 45 विमान हादसे में तीन हिस्सों में टूट गया. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वे तुरंत मौके पर पहुंचे लेकिन आग इतनी तेज थी कि कुछ नहीं कर पाए. कुछ ही मिनटों में पूरा विमान जलकर राख हो गया.
आग बुझाने की कोशिश
स्थानिय लोगों ने शुरुआत में बाल्टियों से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की. थोड़ी देर बाद दमकल और बचाव दल मौके पर पहुंचे तब तक सभी शव बूरी तरह झुलस गए थे. अजित पवार की पहचान उनके हाथ में पहनी घड़ी से हुई. विमान में मौजूद पांचों लोगों की मौत हो गई.
प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया?
लोगों ने बताया कि उन्होने विमान को बहुत कम ऊंचाई पर देखा था और उन्हें लगा कि यह रनवे पर उतर जाएगा लेकिन अचानक धमाके हुए और आग की लपटें उठीं. विमान रनवे से कुछ दूरी पर खाई में गिर गया.
हादसे से जुड़ी अहम टाइमलाइन
- 8 बजकर 18 मिनट पर कम विजिबिलिटी के कारण पायलट लैंडिंग नहीं कए पाए और ATC ने ओअराउंड कहा.
- 8 बजकर 43 मिनट पर एटीसी ने दोबारा लैंडिंग की अनुमति दी.
- 8 बजकर 45 मिनट पर रनवे नंबर 11 पर लैंडिंग की कोशिश हुई लेकिन विमान रनवे से पहले ही गिर गया.
- 8 बजकर 46 मिनट पर विमान धमाके के साथ क्रैश हो गया. कोई इमरजेंसी सिग्नल नहीं मिला.
बारामती एयरस्ट्रिप की चुनौतियां
बारामती की हवाई पट्टी छोटी है और यहां ILS रेडियो लैंडिंग सिस्टम उपलब्ध नहीं है. ILS सिस्टम कम विजिविलिटी में भी सटीक लैंडिंग में मदद करता है लेकिन यहां पायलट को खुद विजुअल अप्रोच करना पड़ता है. यहीं वजह है कि लैंडिंग और भी मुश्किल हो जाती है.
पायलट कितना अनुभवी?
कैप्टन सुमित कपूर के पास 16 हजार घंटे का उड़ान अनुभव था. उनके साथ शांभवी पाठक थीं जिनके पास 1500 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस था. बावजूद इसके रनवे की स्थिति और विजिबिलिटी ने हादसे को टालने नहीं दिया.
रनवे की भौगोलिक स्थिति
बारामति का रनवे 20 से 30 मीटर ऊंचाई पर बना है. ऐसे रनवे पर विमान उतारना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. आसपास का इलाका भी असमान है जिससे पायलट को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है.
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विमान की जानकारी
- बारामती एयरपोर्ट मुंबई से 256 किलोमिटर दूर है.
- विमान का वजन करीब 10 हजार किलो था.
- यह 12 साल पुराना बॉम्बार्डियर प्लेन था.
- VIP यात्रा और कॉरपोरेट मूवमेंट के लिए इस्तेमाल होता था.
- इसमें दो पायलट समेत अधिकतम 9 लोग बैठ सकते थे.
- इसकी अधिकतम रफ्तार 900 किलोमिटर प्रति घंटा था.
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