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स्वागत करिए..! रेपिस्ट के एनकाउंटर पर क्यों भड़क गई महुआ मोइत्रा?

Mahua Moitra on Bengal Encounter: पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 साल की बच्ची के साथ रेप और मर्डर के मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल के पुलिस एनकाउंटर पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा भड़क गई हैं. उन्होंने इस कार्रवाई को ‘उत्तर प्रदेश 2.0’ और ‘जंगलराज’ करार दिया है.

Mahua Moitra on Bengal Encounter

Mahua Moitra on Bengal Encounter: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में एक 11 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म और हत्याकांड के मुख्य आरोपी के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद सूबे की सियासत पूरी तरह सुलग उठी है. जिसे कानून-व्यवस्था की बहाली और त्वरित कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा था, उस पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की तेज-तर्रार सांसद महुआ मोइत्रा के एक तीखे और अप्रत्याशित बयान ने पूरे देश के राजनीतिक कॉरिडोर्स में खलबली मचा दी है.

आमतौर पर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की पैरवी करने वाली टीएमसी की सांसद ने अपनी ही राज्य पुलिस की इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए पश्चिम बंगाल की तुलना उत्तर प्रदेश से कर दी है. महुआ मोइत्रा के इस कदर भड़कने के पीछे की असली वजह?

महुआ मोइत्रा का पुलिस पर बड़ा हमला (Mahua Moitra Slams Bengal Police)

बुधवार तड़के जैसे ही बारुईपुर रेप और मर्डर केस के मुख्य संदिग्ध प्रभाष मंडल के एनकाउंटर में मारे जाने की खबर आधिकारिक तौर पर सामने आई, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बिना समय गंवाए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद तल्ख और तीखा पोस्ट साझा किया. महुआ मोइत्रा ने कानून-व्यवस्था और एक्स्ट्रा-जुडिशियल किलिंग (न्यायेतर हत्या) पर सवाल उठाते हुए लिखा-

“बारुईपुर रेप और मर्डर केस का आरोपी प्रभाष मंडल एनकाउंटर में मारा गया. पश्चिम बंगाल पुलिस, आखिर यह सब क्या हो रहा है? बंगाल के लोगों, अब नए बंगाल यानी कि ‘उत्तर प्रदेश 2.0’ का स्वागत करें. यह कोई सरकार नहीं है, यह तो पूरी तरह से जंगल राज है.”

महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra On Baruipur Rape Murder Case) का यह गुस्सा सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश की ‘एकाउंटर संस्कृति’ पर निशाना था, जिसे वे और उनकी पार्टी अक्सर ‘जंगलराज’ मानकर आलोचना करती रही हैं. लेकिन इस बार जब यही रणनीति बंगाल पुलिस द्वारा अपनाई गई, तो उन्होंने अपनी ही कानून-प्रणाली को आड़े हाथों लेने में कोई संकोच नहीं किया.

 

कैसे हुआ ‘रेपिस्ट’ का एनकाउंटर?

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस मुठभेड़ की पूरी इनसाइड स्टोरी और घटनाक्रम को साझा किया है. मंगलवार देर रात पुलिस की टीम मामले के मुख्य संदिग्ध प्रभाष मंडल को पूरे घटनाक्रम को बारीकी से समझने और सबूतों की शिनाख्त के लिए बारुईपुर के सुर्ज्यपुर हाट इलाके में लेकर गई थी.

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पुलिस अधिकारियों का दावा है कि मौके पर पहुंचते ही आरोपी प्रभाष मंडल ने अचानक घात लगाकर एक पुलिसकर्मी का आधिकारिक हथियार (सर्विस रिवॉल्वर) छीन लिया और वहां से भागने का प्रयास करने लगा. भागने के दौरान आरोपी ने पीछा कर रही पुलिस टीम पर कथित तौर पर अंधाधुंध गोलियां भी चलाईं. इसके बाद पुलिसकर्मियों को अपनी आत्मरक्षा (Self-Defence) में जवाबी फायरिंग करनी पड़ी.

पुलिस की जवाबी गोलीबारी में आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गया. उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस के अनुसार, घटना से पहले के सीसीटीवी फुटेज में आरोपी को मासूम लड़की के साथ देखा गया था, जो उसके मुख्य संदिग्ध होने का सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रमाण था.

बोरी में मिला था बच्ची का शव

इस पूरे मामले की शुरुआत बीते रविवार को हुई थी, जब 11 साल की मासूम बच्ची का शव सुर्ज्यपुर हाट इलाके में एक बोरी में बंद मिला था. इस वीभत्स हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में आक्रोश की आग भड़क उठी. गुस्साई स्थानीय भीड़ ने न्याय की मांग को लेकर बारुईपुर-जयनगर मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया, सड़कों पर टायर जलाए और पुलिस के कई वाहनों में भारी तोड़फोड़ की.

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इसी बीच, कानून हाथ में लेते हुए उग्र भीड़ ने बच्ची की मौत में शामिल होने के संदेह में एक स्थानीय व्यक्ति, इंद्रजीत मंडल की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी. राज्य सरकार ने इस संवेदनशील मामले की गहन तहकीकात के लिए तत्काल एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, जिसके तहत अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था.

मुख्यमंत्री ने 72 घंटे में मांगी रिपोर्ट

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मामले पर बेहद कड़ा और संवेदनशीलता भरा रुख अपनाया है. उन्होंने दक्षिण 24 परगना जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचकर पीड़ित मासूम बच्ची के माता-पिता से मुलाकात की और उन्हें त्वरित न्याय का भरोसा दिलाया. मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक (DGP) सिद्धनाथ गुप्ता को सीधे निर्देश जारी करते हुए इस पूरे दुष्कर्म और हत्याकांड की विस्तृत रिपोर्ट 72 घंटे के भीतर सौंपने का आदेश दिया है.



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