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वो 23 दिसंबर की काली रात… सुमित के साथ हुई हैवानियत का सच आया सामने, पुलिस की एक चूक और चली गई जान

बेगूसराय में मोबाइल दुकानदार सुमित कुमार के अपहरण और हत्या का मामला सामने आया है.

रिपोर्ट- रवि शंकर शर्मा


बेगूसराय से एक ऐसी खबर आई है जिसने ना सिर्फ कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि बिहार की सियासत में भी उबाल ला दिया है. पिछले सात दिनों से लापता मोबाइल दुकानदार सुमित कुमार का अंत इतना दर्दनाक होगा, इसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी. पुलिस ने आखिरकार सुमित का शव गंडक नदी से बरामद कर लिया है, जिसके बाद मृतक के घर में मातम पसरा है और इलाके के लोगों में भारी गुस्सा है.

CCTV में कैद हुई थी खौफनाक वारदात

पूरा मामला लोहिया नगर थाना क्षेत्र के पन्हास का है. घटना की शुरुआत 23 दिसंबर की रात को हुई थी. बताया जा रहा है कि सुमित अपने घर के बाहर ही था, तभी एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो आकर रुकी. गाड़ी से चार अपराधी उतरे और सुमित के साथ मारपीट शुरू कर दी. यह पूरी वारदात पास में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. फुटेज में साफ दिख रहा है कि सुमित जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन अपराधी उसे जबरन गाड़ी में ठूंसकर ले गए. ताज्जुब की बात यह है कि जहां से किडनैपिंग हुई, वहां से थाना महज आधा किलोमीटर दूर है, लेकिन पुलिस को भनक तक नहीं लगी.

हत्यारे ने खुद उगला सच

सुमित के परिजनों ने पुलिस पर लगातार दबाव बनाया, लेकिन कई दिनों तक अंधेरे में तीर चलाने के बाद पुलिस के हाथ एक आरोपी लगा. जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने सारा सच उगल दिया. आरोपी की निशानदेही पर ही चेरिया बरियारपुर के बसही गंडक नदी घाट पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया और सातवें दिन सुमित की लाश बरामद हुई. अपराधियों ने अपहरण वाली रात ही सुमित को मौत के घाट उतारकर लाश नदी में फेंक दी थी.

अपनी ही सरकार पर बरसे JDU नेता

इस हत्याकांड ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है. हैरानी की बात यह है कि विपक्षी दल तो दूर, सत्ताधारी जेडीयू (JDU) के अंदर से ही बगावत के सुर उठने लगे हैं. युवा जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष गौरव सिंह राणा ने अपनी ही सरकार के गृह विभाग पर सीधा हमला बोला है.

उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि जब से गृह मंत्रालय सम्राट चौधरी के पास गया है, तब से अपराधी ‘नंगा नाच’ कर रहे हैं. राणा ने यहाँ तक कह दिया कि सम्राट चौधरी से मंत्रालय संभल नहीं रहा है और उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने नीतीश कुमार के दौर को याद करते हुए कहा कि पहले बिहार में अपराधी इतने बेलगाम नहीं थे.

पुलिस की कार्यशैली पर उठता सवाल

फिलहाल पुलिस ने एक आरोपी को जेल भेज दिया है, लेकिन तीन मुख्य आरोपी अब भी फरार हैं. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे पुलिस की सुस्ती पर सवाल उठा रहे हैं. सवाल यह है कि अगर पुलिस ने अपहरण के तुरंत बाद नाकेबंदी की होती, तो क्या सुमित की जान बच सकती थी? बेगूसराय की इस घटना ने एक बार फिर बिहार में सुशासन के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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