Bengaluru Cat Custody Dispute: गार्डन सिटी बेंगलुरु से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस और सोशल मीडिया यूजर्स दोनों का सिर चकरा दिया है. अक्सर आपने जमीन, जायदाद या पार्किंग को लेकर पड़ोसियों को भिड़ते देखा होगा, लेकिन बेंगलुरु के शेषाद्रीपुरम इलाके में दो पड़ोसी इस बात पर आमने-सामने आ गए कि बिल्ली के नवजात बच्चों का ‘असली हकदार’ कौन है और उनका ‘खर्चा’ कौन उठाएगा? मामला इतना बढ़ गया कि सुलह कराने के लिए खाकी वर्दी वालों को दखल देना पड़ा.
बिल्ली मां बनी तो ‘पिता’ के मालिक से मांगा हर्जाना
विवाद की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है. शेषाद्रीपुरम में रहने वाले एक परिवार की पालतू बिल्ली ने हाल ही में चार बेहद खूबसूरत बच्चों को जन्म दिया. खुश होने के बजाय बिल्ली का मालिक सीधे पड़ोसी के घर जा धमका. आरोप था कि इन बच्चों का ‘पिता’ पड़ोसी का पालतू बिल्ला है इसलिए अब इन चार नन्हे मेहमानों के पालन-पोषण और खान-पान की आधी जिम्मेदारी पड़ोसी को उठानी होगी. बिल्ली के मालिक का तर्क था कि चूंकि ‘पिता’ पड़ोसी का जानवर है, इसलिए वे इस जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते.
बच्चों की ‘कस्टडी’ पर छिड़ी जंग: पुलिस भी हैरान
देखते ही देखते यह बहस ‘पैट पैरेंटिंग’ से निकलकर कानूनी अधिकारों तक पहुंच गई. पड़ोसी का कहना था कि जानवर अपनी मर्जी से मिलते हैं, इसमें मालिक का क्या कसूर? वहीं बिल्ली की मालकिन इन बच्चों के भविष्य और उनके खर्चे के लिए ‘चाइल्ड सपोर्ट’ (Pet Support) जैसी मांग पर अड़ गई. बात तू-तू, मैं-मै से बढ़कर तीखी नोकझोंक में बदल गई और आखिर में मामला थाने जा पहुंचा. पुलिस अधिकारी भी तब सोच में पड़ गए जब उन्हें पता चला कि उन्हें इंसानों के नहीं बल्कि चार बिल्लियों के बच्चों के ‘कस्टडी और मेंटेनेंस’ विवाद को सुलझाना है.
पुरानी रंजिश नहीं, ‘कैट लव’ बना फसाद की जड़
इलाके के लोग इस अनोखी लड़ाई को देखकर हैरान हैं. आमतौर पर बेंगलुरु जैसे हाई-टेक शहर में लोग अपने काम से काम रखते हैं, लेकिन इस ‘कैट डिस्प्यूट’ ने पूरे मोहल्ले का ध्यान खींच लिया है. पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत करने की कोशिश की है, लेकिन बिल्ली की मालकिन अब भी अपने हक के लिए अड़ी हुई है. सोशल मीडिया पर यह खबर आग की तरह फैल रही है और लोग मजे लेते हुए पूछ रहे हैं कि क्या अब बिल्लियों का भी डीएनए टेस्ट कराना पड़ेगा?
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-भारत एक्सप्रेस
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