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‘सबसे स्‍वच्‍छ’ शहर में प्रदूषित पानी से मचा हाहाकार: भागीरथपुरा में क्‍यों दर्जनों लोगों की जानें गईं? Bharat Express की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

भारत एक्सप्रेस के ग्रुप एडिटर सुदेश तिवारी ने भागीरथपुरा मामले में अहम सवालों के जवाब तलाशे. इंदौर की ये घटनाएं बताती हैं कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा में लापरवाही कितनी खतरनाक हो सकती है. इंदौर जैसे शहर में ऐसी स्थिति सबके लिए चेतावनी है.

Bhagirathpura Water Contamination
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Bhagirathpura Incidents: मध्‍य प्रदेश में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर डाला. पिछले दिनों यहां पानी में गंदगी मिलने से उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला. जिससे 24 लोगों की जान चली गई. कई लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है. भारत एक्सप्रेस के ग्रुप एडिटर सुदेश तिवारी ने इस मामले पर विस्तार से चर्चा की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए.

गंदे पानी की सप्‍लाई और उससे हुई मौतें

दिसंबर 2025 के आखिर में भागीरथपुरा में घरों में सप्लाई होने वाला पानी दूषित पाया गया. लोगों को उल्टी-दस्त होने लगा. अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लग गई. स्वास्थ्य विभाग ने कई लोगों को भर्ती किया. लेकिन इलाज के बावजूद 24 लोगों ने दम तोड़ दिया. एक महिला ने बेटी के घर रहते हुए भी जान गंवाई. यह घटना इंदौर जैसे स्वच्छ शहर के लिए बहुत बड़ी शर्मिंदगी बनी.

भोपाल से आए एक आदेश ने रोका काम

आज बड़ा खुलासा यह हुआ कि मौतों की असली वजह प्रशासनिक लापरवाही है. अर्बन बॉडीज कमिश्नर संकेत भोंडवे ने भोपाल से एक पत्र जारी किया. इस पत्र में कहा गया कि नई एसओआर (स्टैंडर्ड ऑफ रेट्स) आने तक कोई नया निर्माण कार्य, टेंडर या काम नहीं होगा. इससे इंदौर म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के कई काम रुक गए. पानी की लाइनें ठीक करने, लीकेज सुधारने का काम महीनों तक अटका रहा. राजेश ने बताया कि निवासियों ने 1.5 से 2 महीने पहले ही गंदे पानी की शिकायत की थी. लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

अधिकारियों पर सवाल, कुछ को हटाया

जानलेवा घटनाओं के बाद हड़बड़ी मची. इंदौर म्यूनिसिपल कमिश्नर दिलीप यादव को हटा दिया गया. हालांकि वे सिर्फ 4-5 महीने से पद पर थे. रोहित सोसोनिया जैसे अधिकारियों पर भी देरी का आरोप लगा. कांग्रेस ने आंदोलन किए. राहुल गांधी भी इंदौर पहुंचे और धरना दिया. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने सरकार पर सख्त टिप्पणियां कीं. सुदेश तिवारी ने कहा कि असली दोषी छिपे हुए हैं. म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, लेकिन भोपाल के अफसरों का रोल भी बड़ा है.

एमपी की नौकरशाही हावी होने की बात

मध्य प्रदेश की नौकरशाही पर सवाल उठे, कहा गया कि दिल्ली से आए अफसरों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है. अनुभवी राज्य सेवा के अफसरों को साइडलाइन किया जा रहा है. फाइलें महीनों अटकी रहती हैं. इससे काम रुकता है और जनता को नुकसान होता है. भारत एक्सप्रेस के ग्रुप एडिटर सुदेश तिवारी ने पत्र का जिक्र किया. उन्‍होंने कहा कि यह पत्र सबूत है कि काम रुकने की वजह भोपाल का आदेश था. मुख्यमंत्री मोहन यादव से अपील है कि वे सख्त कार्रवाई करें.

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साफ पानी और न्याय की मांग कर रहे लोग

लोग अब साफ पानी और न्याय की मांग कर रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे तेज किया है. पानी उबालकर पीने की सलाह दी जा रही है. लेकिन सवाल यह है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. वरिष्ठ पत्रकार राजेश ने कहा कि सरकार को रिजल्ट देने वाले अफसरों को मुख्य लाइन में लाना चाहिए. सुदेश तिवारी ने कहा कि यह मौतें हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही का नतीजा हैं. जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए.

-भारत एक्सप्रेस



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