Bharat Tiwari Encounter Case
Bharat Tiwari Encounter Case: आरा के भरत तिवारी एनकाउंटर के मामले में अब सरकार बैकफुट पर है. सीएम सम्राट चौधरी ने इसकी जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में कराने का फैसला किया है. सीएम चौधरी का कहना है कि इस जांच का उद्वेश्य सभी पहलुओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता से जांच कर जनता के सामने लाना है.
भरत तिवारी के एनकाउंटर पर पूरे शाहाबाद इलाके में सरकार और प्रशासन के खिलाफ खासा आक्रोश देखा जा रहा है. लोग पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर करने के आरोप लगा रहे हैं.
2 एफआईआर हुई है दर्ज
इस मामले में पुलिस ने 2 एफआईआर दर्ज की है, जिसमें पहली में पुलिस पर फायरिंग करने, अवैध हथियार रखने और आरोपी को संरक्षण देने के आरोपों में केस दर्ज किया है. इस मामले में भरत के पिता और भाई को आरोपी बनाया गया है.
वहीं दूसरा एफआईआर भरत तिवारी की मां आशा देवी ने किया है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में आशा देवी ने जगदीशपुर के DSP और शाहपुर के थानाध्यक्ष के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है. हालांकि इस मामले में पुलिस ने अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया है.
भरत तिवारी पक्ष के क्या हैं आरोप?
भरत तिवारी की मां के मुताबिक यह मामला 17 जून का है. सुबह 8 बजे के करीब जगदीशपुर पुलिस उपाधीक्षक दल बल के साथ उनके घर पहुंचे. उस समय भरत तिवारी फेसबुक पर लाइव था और उसके हाथ में पिस्तौल थी. पुलिस ने उनसे कहा कि जवइनिया गांव के विस्थापित लोग जहां रहते हैं हमें उस जगह पर ले चलो. बताओ कि लोगों की क्या-क्या समस्याएं हैं. जिसके बाद पुलिस वालों के साथ भरत चला गया. उसने पुलिस के सामने अपना हथियार फेंक दिया और खुद को सरेंडर कर दिया. लेकिन पुलिस वालों ने उसपर दनादन गोलियां दाग दी. उसे 5 गोली मारकर गाड़ी में लाद कर चले गए. उस दिन पुलिस ने उनके पति को शाहपुर थाने में पूरे दिन बैठाकर रखा. बाद में पुलिस ने बताया कि उसके बेटे की मौत हो गई है.
पुलिस का ये है कहना
घटना के समय शाहपुर के थानाध्यक्ष रहे रजनीश कुमार के बयान पर इस मामले में पहला एफआईआर दर्ज किया गया. जिसमें बताया गया कि पुलिस को इनपुट मिली थी कि भरत भूषण तिवारी अवैध हथियार रखा था. 17 जून को पुलिस उसेक बिलौंटी गांव में मौजूद घर पहुंची. पुलिस को दरवाजे पर पहुंचते ही भरत उग्र हो गया और फायरिंग का प्रयास किया. बाद में दरवाजा बंद कर लिया. इसेक बाद वो छत पर चढ़ा और पुलिस की टीम पर कई राउंड फायरिंग की.
पुलिस ने कई बार उसे आत्मसमर्पण की चेतावनी दी, लेकिन वो फायरिंग करता रहा. उसने एक हाथ में मोबाइल पकड़े था और दूसरे हाथ में पिस्टल लेकर लगातार चुनौती दे रहा था.
एफआईआर के मुताबिक एक बार उसने पिस्टल फेंक दी, लेकिन जब एक जवान उसका फेंका हथियार उठाने के लिए आगे बढ़ा तो वो दोबारा पिस्टल उठाकर दो राउंड फायरिंग की. जिसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में कमर के नीचे 4 राउंड फायरिंग कर दी. जो गोली उसके पैर में लगी. जिससे वो गिर पड़ा.
पुलिस ने उसे उठाकर शाहपुर रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया. जहां उसकी मौत हो गई. घटनास्थल से पुलिस ने 2 खोखा, एक देसी पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद की है.
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पहले भी रह चुका है आरोपी
पुलिस का कहना है कि भरत भूषण तिवारी पर साल 2025 में एससी-एसटी एक्ट और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के मामले में आरोपी रह चुका है. उसकी चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है. फिलहाल पुलिस और परिजनों के दावों की पड़ताल करने के लिए जांच चल रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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